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पश्चिमी सिंहभूम में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए प्रशासन सख्त, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की होगी नियमित निगरानी

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पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन ने कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने और लिंगानुपात में सुधार लाने के लिए सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को पीसीपीएनडीटी अधिनियम का पूरी गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी अल्ट्रासाउंड केंद्र के खिलाफ बिना देरी के कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में बेटी बचाओ अभियान, अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण, नवीनीकरण और न्यायालय में लंबित मामलों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि अधिनियम से जुड़े सभी कार्य समय पर पूरे किए जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।

उपायुक्त ने कहा कि जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान यदि किसी केंद्र में अनियमितता या कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संस्थान पर पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य कानून का प्रभावी पालन कराना और भ्रूण लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना है।

बैठक में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। जिन सरकारी अस्पतालों में पहले से अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध है, वहां सेवाओं को नियमित रूप से संचालित करने के निर्देश दिए गए ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों तक भी अल्ट्रासाउंड सुविधा पहुंचाने की योजना पर चर्चा की गई, जिससे दूर-दराज के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

इस दौरान पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करते हुए बेटियों की सुरक्षा, लिंगानुपात में सुधार और पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी पालन को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई गई।