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Venezuela भूकंप: 6 दिन बाद मलबे से जिंदा निकला मासूम 50 हजार से अधिक लोग अब भी लापता; जानिए कितने दिन तक बच सकती है जिंदगी

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NEW DELHI : वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के छह दिन बाद राहत एवं बचाव दल ने मलबे से तीन वर्षीय एक बच्चे को जीवित बाहर निकालकर उम्मीद की नई किरण जगाई है। हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब भी 50 हजार से अधिक लोग लापता हैं और आशंका है कि इनमें बड़ी संख्या मलबे के नीचे फंसी हो सकती है। समय बीतने के साथ जीवित बचे लोगों की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार मलबे में दबे व्यक्ति के जीवित रहने की अवधि कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है। यदि सिर रीढ़ या छाती में गंभीर चोट न लगी हो और पर्याप्त हवा व सीमित मात्रा में पानी मिल जाए तो कुछ लोग कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं। अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल के आपदा चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. जैरोन ली का कहना है कि पांच से सात दिन बाद किसी व्यक्ति का जीवित मिलना बेहद दुर्लभ होता है।

24 जून को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने वेनेजुएला में भारी तबाही मचाई। अब तक 1,943 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि 10 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं। राहत एजेंसियों का मानना है कि बड़ी संख्या में लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं।

बचाव अभियान में वेनेजुएला की आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ दुनिया के 30 देशों से पहुंचे 2,600 से अधिक राहतकर्मी और 160 से ज्यादा खोजी कुत्ते जुटे हुए हैं। भारत ने भी 41 सदस्यीय विशेषज्ञ बचाव दल भेजा है। थर्मल कैमरों साउंड सेंसर और खोजी कुत्तों की मदद से जीवित लोगों की तलाश लगातार जारी है।

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विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार मलबे से जीवित निकाले जाने के बावजूद पीड़ित की मौत हो जाती है। इसका मुख्य कारण क्रश सिंड्रोम होता है। लंबे समय तक शरीर का कोई हिस्सा दबा रहने से मांसपेशियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और जहरीले तत्व शरीर में जमा हो जाते हैं। जैसे ही व्यक्ति को बाहर निकाला जाता है ये तत्व रक्त के साथ पूरे शरीर में फैलकर किडनी फेल होने या हृदय गति रुकने जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं। इसी कारण रेस्क्यू टीमें मलबे से निकालने से पहले मरीज को विशेष चिकित्सकीय सहायता और तरल पदार्थ (IV फ्लूइड) देना शुरू कर देती हैं।

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विशेषज्ञों ने भूकंप से बचाव के लिए पहले से तैयारी करने की भी सलाह दी है। भारी फर्नीचर को दीवार से मजबूती से बांधना, तीन दिन के लिए पानी सूखा भोजन टॉर्च दवाइयों और जरूरी दस्तावेजों की इमरजेंसी किट तैयार रखना तथा ड्रॉप कवर एंड होल्ड ऑन जैसी सुरक्षा तकनीकों का अभ्यास करना जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

राहत एजेंसियों का कहना है कि आने वाले एक-दो दिनों में यदि मलबे से कोई और जीवित व्यक्ति नहीं मिलता है तो वैज्ञानिक आकलन के आधार पर खोज एवं बचाव अभियान को सीमित या समाप्त करने पर निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर वेनेजुएला में चल रहे राहत अभियान पर टिकी हुई है।

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