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राज्यसभा के 266 सांसदों के पास 26 हजार करोड़ की संपत्ति, हर तीसरे सांसद पर आपराधिक मामला

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NEW DELHI : राज्यसभा के सांसदों की संपत्ति शिक्षा आपराधिक मामलों और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर सामने आई एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट कई अहम तथ्य उजागर करती है। रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा के 266 सांसदों की कुल घोषित संपत्ति 26 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं हर तीसरे सांसद पर आपराधिक मामला दर्ज है।

संपत्ति के मामले में सबसे आगे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद वाई.वी. सुब्बा रेड्डी हैं जिन्होंने 5,683 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है। दूसरे स्थान पर पंजाब से भाजपा सांसद राजिंदर गुप्ता हैं जिनकी घोषित संपत्ति 5,053 करोड़ रुपये से अधिक है। तीसरे स्थान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी हैं जिन्होंने 2,558 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है। समाजवादी पार्टी की सांसद और अभिनेत्री जया बच्चन 1,578 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के साथ चौथे स्थान पर हैं।

झारखंड से राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी ने 755 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है जिससे वे देश के सबसे अमीर सांसदों में शामिल हो गए हैं। हालांकि उनके ऊपर 256 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारियां भी दर्ज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड के छह राज्यसभा सांसदों की कुल घोषित संपत्ति लगभग 779 करोड़ रुपये है।

जहां कई सांसदों की संपत्ति हजारों करोड़ रुपये में है वहीं पंजाब के संत बलबीर सिंह ने मात्र 3.79 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है जो राज्यसभा में सबसे कम है। इसके अलावा केरल के ए.ए. रहीम ने 11.62 लाख रुपये और मध्य प्रदेश की सुमित्रा बाल्मिक ने 17.85 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है।

राज्यों के आधार पर देखें तो तेलंगाना के राज्यसभा सांसद सबसे अधिक संपन्न हैं। वहां के सांसदों की कुल घोषित संपत्ति 8,310 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बाद पंजाब (5,729 करोड़ रुपये) और उत्तर प्रदेश का स्थान है। इन राज्यों से बड़ी संख्या में उद्योगपति कारोबारी और आर्थिक रूप से मजबूत नेता राज्यसभा पहुंचे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्यसभा के अधिकांश सांसद उच्च शिक्षित हैं। 68 सांसद पोस्ट ग्रेजुएट 53 ग्रेजुएट और 33 सांसद डॉक्टरेट की डिग्रीधारी हैं। लॉ इंजीनियरिंग मेडिकल मैनेजमेंट और सोशल साइंस जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी बड़ी संख्या में सदन में मौजूद हैं।

हालांकि महिला प्रतिनिधित्व अब भी सीमित है। राज्यसभा में कुल 34 महिला सांसद हैं जबकि पुरुष सांसदों की संख्या 192 है। यानी महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत ही है जबकि महिला आरक्षण कानून लागू होने के बाद भी संसद में संतुलित भागीदारी का लक्ष्य अभी दूर नजर आता है।