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राम मंदिर पर फिर उठे सवाल: जमीन सौदे से दान घोटाले तक, आरोपों और जांच के घेरे में ट्रस्ट

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Ayodhya: राम मंदिर निर्माण से जुड़े विवाद एक बार फिर चर्चा में हैं। 2021 में सामने आए जमीन खरीद विवाद की गूंज अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुई थी कि 2026 में मंदिर को मिले दान और चढ़ावे के इस्तेमाल को लेकर नए आरोपों ने मामला फिर गरमा दिया है। हालांकि, अब तक सामने आई जानकारी अधूरी है लेकिन आरोपों की गंभीरता ने पूरे मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने एक बार फिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनके आरोपों को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

वहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से महासचिव चंपत राय ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए ट्रस्ट का पक्ष रखा है। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण और दान राशि से जुड़े सभी कार्य निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रियाओं के तहत किए गए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां विभिन्न आरोपों और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं। जांच के दौरान जमीन खरीद दान राशि के उपयोग और संबंधित वित्तीय लेन-देन के पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है।

फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।