बंगाल में मिड-डे मील के अंडों पर सियासत तेज, डेरेक ओ’ब्रायन बोले- शाकाहार नहीं थोपने देंगे

KOLKATA : पश्चिम बंगाल में मिड-डे मील से अंडे हटाए जाने की अटकलों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बच्चों को पोषण से वंचित कर राज्य में शाकाहार थोपने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
डेरेक ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि बंगाल के लोग खान-पान के मामलों में किसी तरह की दखलंदाजी स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान मछली खाने को लेकर विवाद खड़ा किया गया था और अब मिड-डे मील में अंडों को लेकर नई बहस शुरू कर दी गई है। उनके मुताबिक बच्चों के पोषण से जुड़े मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ कि मिड-डे मील में अंडों की जगह पनीर और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। इन दावों के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। हालांकि राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विवाद की एक वजह पश्चिम बंगाल सरकार का वह फैसला भी है जिसके तहत कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के स्कूलों में पका हुआ मिड-डे मील उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपी गई है। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक कथित मेन्यू वायरल हुआ जिसमें अंडों की जगह अन्य खाद्य पदार्थों को शामिल किए जाने का दावा किया गया।
इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधा रमन दास ने वायरल मेन्यू को फर्जी बताते हुए कहा कि अभी तक मिड-डे मील का कोई अंतिम मेन्यू तय नहीं किया गया है। उन्होंने X पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सूची उनकी संस्था की ओर से जारी नहीं की गई है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपुष्ट जानकारी साझा करने से बचें। उनका कहना है कि मेन्यू अंतिम रूप लेने के बाद उसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी।क्या है PM पोषण योजना?
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) योजना के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। योजना का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण कम करना स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना और बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करना है। ऐसे में मिड-डे मील में अंडों को लेकर उठी बहस अब पोषण के साथ-साथ राजनीतिक मुद्दा भी बन गई है।

