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‘घर लौटना है तो 1.2 लाख दोः ओमान में फंसी झारखंड की युवती की गुहार, नौकरी के नाम पर धोखे का आरोप

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विदेश में बेहतर नौकरी का सपना लेकर घर से निकली झारखंड के सिमडेगा की 22 वर्षीय आदिवासी युवती प्रीति कुजूर अब ओमान में फंसी हुई हैं। प्रीति का आरोप है कि उन्हें दुबई में घरेलू कामगार की नौकरी का झांसा देकर ओमान भेज दिया गया, जहां अब घर लौटने के लिए उनसे 1.2 लाख रुपये मांगे जा रहे हैं।

प्रीति के मुताबिक इस साल की शुरुआत में एजेंटों ने उन्हें और सिमडेगा की दो अन्य महिलाओं को दुबई में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। लेकिन दिल्ली से रवाना होने से ठीक पहले बताया गया कि उन्हें दुबई नहीं, बल्कि ओमान भेजा जाएगा। विरोध करने पर एजेंटों ने कुछ महीनों बाद दुबई भेजने का आश्वासन दिया।

ओमान पहुंचने के बाद हालात और भी बदतर हो गए। प्रीति का आरोप है कि एयरपोर्ट पर ही उनका फोन और पासपोर्ट ले लिया गया। कई दिनों तक उन्हें एक कमरे में रखा गया और बाद में घरेलू कामगार के रूप में काम पर भेज दिया गया। उनका कहना है कि तय शर्तों से कहीं अधिक काम कराया जा रहा है। जब उन्होंने भारत लौटने की इच्छा जताई तो स्थानीय एजेंटों ने करीब 1.2 लाख रुपये जमा करने की शर्त रख दी।

प्रीति के साथ गई सिमडेगा की रेखा केरकेट्टा किसी तरह परिवार की मदद से लगभग 1.4 लाख रुपये खर्च कर भारत लौट सकीं। उनका आरोप है कि एजेंटों ने पहले से हुए खर्च का हवाला देकर महिलाओं पर ओमान जाने का दबाव बनाया और उन्हें एक जाल में फंसा दिया।

मामला सामने आने के बाद आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता ऑगस्टिना सोरेन ने अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद झारखंड श्रम विभाग और राज्य प्रवासी श्रमिक सेल सक्रिय हुए। विभाग का कहना है कि प्रीति से संपर्क स्थापित कर लिया गया है और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए भारतीय दूतावास से मदद मांगी गई है।

प्रीति का कहना है कि वह अकेली नहीं फंसी हैं। उनके साथ केरल की एक महिला भी है, जिसकी तबीयत लगातार खराब है। दोनों ने जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लौटने की गुहार लगाई है। इस घटना ने विदेश में नौकरी दिलाने वाले एजेंटों की कार्यप्रणाली और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।