झारखंड में राशन कार्ड से हट सकते हैं लाखों नाम, भूख और कुपोषण का खतरा, CM को पत्र…

Jharkhand: झारखंड में लाखों लोगों के राशन कार्ड से नाम हटाए जाने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे गरीब, वृद्ध, दिव्यांग और आदिवासी समुदाय के लोग राशन से वंचित हो सकते हैं। इसको लेकर ‘भोजन का अधिकार अभियान’ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर राशन कार्ड विलोपन (नाम हटाने) पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
अभियान ने चेताया है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो राज्य में भूख और कुपोषण की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
जन वितरण प्रणाली (PDS) के आहार पोर्टल के अनुसार, 14 जुलाई 2025 तक करीब 74.6 लाख लाभार्थियों का ई-केवाईसी बाकी है जिसमें से 8.24 लाख राशन कार्ड ऐसे हैं, जिनमें एक भी सदस्य का सत्यापन नहीं हुआ है।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत 30 जून तक ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया था लेकिन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में तकनीकी दिक्कतों के कारण लोग इसे पूरा नहीं कर पाए।
•वृद्ध और दिव्यांगों के फिंगरप्रिंट ईपोस मशीन में काम नहीं कर पा रहे।
•कई क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्शन कमजोर और मशीनें टूजी नेटवर्क पर हैं।
•बच्चों के पास बाल आधार तो है लेकिन उससे ई-केवाईसी संभव नहीं हो पा रहा।
•’मेरा ई-केवाईसी ऐप’ भी कई बार काम नहीं करता जिससे परेशानी और बढ़ जाती है।
•विशेष रूप से आदिम जनजाति परिवारों को राहत देने की मांग
अभियान ने मांग की है कि आदिम जनजाति और दूर-दराज़ के गरीब परिवारों को बिना ई-केवाईसी के भी राशन मिलना चाहिए ताकि उन्हें इस प्रक्रिया की वजह से भूख से न जूझना पड़े।
सरकार से अपील
भोजन का अधिकार अभियान ने आग्रह किया है कि:
•राशन कार्ड विलोपन पर तुरंत रोक लगाई जाए।
•तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए।
•सभी पात्र लोगों को राशन देने की गारंटी सुनिश्चित की जाए।
यह मामला राज्य के लाखों गरीब लोगों के जीवन और भोजन से जुड़ा है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द फैसला ले।


