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झारखंड में तीन महीने में 13,647 अपराध, 329 हत्याएं, 434 किडनैपिंग और 374 रेप के मामले।। पढ़िए Azad Reporter की खास रिपोर्ट…

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झारखंड में साल 2026 की पहली तिमाही के अपराध आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। जनवरी से मार्च 2026 के बीच राज्यभर में कुल 13,647 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक हत्या, अपहरण, दुष्कर्म, चोरी, दंगे और महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार सामने आते रहे। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में संपत्ति संबंधी अपराधों के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

झारखंड पुलिस के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 में 4,930, फरवरी में 4,155 और मार्च में 4,562 मामले दर्ज किए गए। तीनों महीनों को मिलाकर सबसे अधिक 9,837 मामले “अन्य अपराध” श्रेणी में दर्ज हुए। इसके अलावा हत्या, किडनैपिंग, रेप और चोरी जैसे गंभीर अपराधों की संख्या भी काफी अधिक रही।

आंकड़ों के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 के बीच राज्य में 329 लोगों की हत्या हुई। जनवरी में 106, फरवरी में 89 और मार्च में 134 हत्या के मामले दर्ज किए गए। वहीं 434 अपहरण के मामले सामने आए, जिनमें जनवरी में 125, फरवरी में 128 और मार्च में 181 मामले शामिल हैं। इसके अलावा फिरौती के लिए अपहरण के भी 9 मामले दर्ज किए गए।

महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बात करें तो तीन महीनों में 374 दुष्कर्म (रेप) के मामले दर्ज किए गए। जनवरी में 102, फरवरी में 134 और मार्च में 138 मामले सामने आए। वहीं 57 दहेज हत्या और 13 डायन हत्या के मामले भी दर्ज किए गए, जो समाज में व्याप्त कुरीतियों और महिलाओं के प्रति हिंसा की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।

संपत्ति संबंधी अपराधों में भी बड़ी संख्या में मामले दर्ज हुए हैं। तीन महीनों में 1,703 चोरी और 447 घरों में चोरी की घटनाएं हुईं। इसके अलावा 40 सड़क लूट, 9 सड़क डकैती, 7 घर में घुसकर डकैती और 3 घर में घुसकर लूट के मामले भी सामने आए हैं।

कानून-व्यवस्था से जुड़े आंकड़ों में तीन महीनों के दौरान 222 दंगों के मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं 130 आर्म्स एक्ट और 28 नक्सल संबंधित मामले भी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुए हैं। विस्फोटक अधिनियम से जुड़े 7 मामले भी सामने आए हैं।

मार्च महीने में कई अपराधों में बढ़ोतरी देखने को मिली। हत्या के 134, अपहरण के 181, दुष्कर्म के 138 और दंगों के 95 मामले मार्च में दर्ज किए गए, जो जनवरी और फरवरी की तुलना में अधिक हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि राज्य में अपराध नियंत्रण की चुनौती अभी भी बनी हुई है।

अपराध के ये आंकड़े झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा, बढ़ती आपराधिक घटनाओं और संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस और प्रशासन को और अधिक सख्त तथा रणनीतिक कदम उठाने की आवश्यकता है। वहीं आम लोगों का भी मानना है कि अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और मजबूत कानून व्यवस्था ही अपराध के बढ़ते ग्राफ को रोक सकती है।