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झारखंड न्यूज़: डोरंडा का पुराना हाईकोर्ट भवन अब मध्यस्थता कार्यवाहियों के लिए होगा इस्तेमाल

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झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा स्थित पुराने हाईकोर्ट भवन के एक हिस्से को मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) से जुड़ी कार्यवाहियों के लिए उपयोग करने का फैसला लिया है। इसके लिए नई नीति लागू कर दी गई है, जिसके तहत भवन का इस्तेमाल केवल मध्यस्थता मामलों की सुनवाई के लिए किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह सिर्फ परिसर उपलब्ध कराएगा। किसी भी विवाद के निपटारे या मध्यस्थता प्रक्रिया के संचालन में अदालत की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होगी। इस व्यवस्था की निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारी रजिस्ट्रार जनरल को सौंपी गई है।

फिलहाल भवन की पहली मंजिल पर दो कक्ष उपलब्ध कराए गए हैं। छोटे कक्ष में 7 से 8 लोगों के बैठने की व्यवस्था है, जिसके लिए प्रतिदिन 5,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं बड़े हॉल में 20 से अधिक लोगों के बैठने की सुविधा होगी और इसके उपयोग के लिए 7,000 रुपये प्रतिदिन शुल्क देना होगा।

नई नीति के अनुसार, इस परिसर का उपयोग केवल मध्यस्थता कार्यों तक सीमित रहेगा। यहां किसी भी प्रकार की राजनीतिक बैठक, प्रेस कॉन्फ्रेंस, व्यावसायिक गतिविधि या अन्य गैर-अधिकृत कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं होगी।