लखनऊ जैसा हादसा कहीं जमशेदपुर में न दोहराए, जमशेदपुर के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा पर बड़ा सवाल, अधिकांश के पास नहीं है फायर NOC

जमशेदपुर : लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड में कई बच्चों की मौत के बाद भी जमशेदपुर के कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। शहर के साकची, बिष्टुपुर, मानगो और आमबागान समेत कई इलाकों में संचालित अधिकांश कोचिंग सेंटर बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के चल रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में 350 से अधिक छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान संचालित हैं, जहां 40 हजार से अधिक छात्र पढ़ाई करते हैं। इनमें से अधिकांश संस्थानों के पास अग्निशमन विभाग (फायर विभाग) का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं है। कई संस्थान बहुमंजिला इमारतों और संकरी गलियों में संचालित हो रहे हैं, जहां आपात स्थिति में छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन सकता है।
कई कोचिंग संस्थानों में इमरजेंसी एग्जिट की सुविधा नहीं है और आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि आग लगने या शॉर्ट सर्किट जैसी घटना होने पर दमकल वाहनों के लिए मौके तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
नियमों के अनुसार प्रत्येक कोचिंग संस्थान में अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार, अग्निशामक यंत्र, रेत की बाल्टियां, प्राथमिक उपचार किट, सीसीटीवी कैमरे और भवन की सुरक्षा संबंधी प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है। साथ ही कक्षाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद कई संस्थानों में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
अभिभावकों ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वे बच्चों की पढ़ाई के लिए भारी फीस दे रहे हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। वहीं विशेषज्ञों ने जिला प्रशासन से सभी कोचिंग संस्थानों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों को लागू नहीं किया गया, तो जमशेदपुर में भी किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

