Instagram पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट के प्रचार का आरोप BBC रिपोर्ट के बाद सरकार सख्त

NEW DELHI : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram एक गंभीर विवाद में घिर गया है। BBC की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में Instagram के जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़े अवैध कंटेंट (CSAM) का प्रचार किया जा रहा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मेटा से जवाब तलब करने की तैयारी शुरू कर दी है।
BBC की जांच के अनुसार Instagram पर कुछ विज्ञापनों में ऐसे आपत्तिजनक कीवर्ड इस्तेमाल किए जा रहे थे जिन पर क्लिक करने के बाद यूजर्स दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर पहुंच जाते थे जहां बच्चों के यौन शोषण से जुड़े अवैध वीडियो कथित तौर पर बेचे जा रहे थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन चैनलों पर बेहद कम कीमत में ऐसे गैरकानूनी कंटेंट उपलब्ध कराए जाने का दावा किया जा रहा था।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान पत्रकार ने एक नया Instagram अकाउंट बनाकर केवल कुछ वयस्क मॉडल्स की प्रोफाइल देखीं। इसके बाद प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम धीरे-धीरे अधिक अश्लील सामग्री दिखाने लगा और अंततः कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े संदिग्ध कंटेंट तक पहुंचने लगा।
BBC ने अपनी रिपोर्ट में meta के पूर्व उपाध्यक्ष ब्रायन बोलैंड के हवाले से कहा कि सोशल मीडिया algorithm यूजर की रुचि के आधार पर लगातार अधिक उत्तेजक सामग्री दिखाने का प्रयास करता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका और यूरोप की तुलना में ग्लोबल साउथ के देशों में सुरक्षा उपायों पर अपेक्षाकृत कम निवेश किया गया है।
Meta ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि कंपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। कंपनी के अनुसार वर्ष 2025 में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल 40 लाख से अधिक अकाउंट्स हटाए गए। टेलीग्राम का कहना है कि उसने 2026 में अब तक बच्चों के यौन शोषण से जुड़े लगभग 2.74 लाख ग्रुप और चैनल्स पर कार्रवाई की है।
भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अश्लील सामग्री का निर्माण प्रसारण साझा करना या देखना कानूनन गंभीर अपराध है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67B के तहत ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस मामले में मेटा के अधिकारियों से जवाब मांगे जाने के निर्देश दिए हैं। सरकार पूरे मामले की जांच कर रही है और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़े किसी भी संदिग्ध या अवैध यौन शोषण संबंधी कंटेंट का सामना ह तो उसे तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें और किसी भी स्थिति में उसे साझा या डाउनलोड न करें। इससे बच्चों की सुरक्षा और कानून के पालन—दोनों में मदद मिलती है।

