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वोटर लिस्ट से नाम हटने पर पूर्व संपादक आर. राजगोपाल का पासपोर्ट वेरिफिकेशन अटका, पुलिस ने कहा- पहले नाम जुड़वाइए

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NEW DELHI / KOLKATA : The Telegraph के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल का पासपोर्ट नवीनीकरण (रिन्यूअल) फिलहाल अटक गया है। राजगोपाल का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के बाद पुलिस ने उनका पासपोर्ट वेरिफिकेशन रोक दिया। पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि जब तक उनका नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल नहीं हो जाता तब तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती।

राजगोपाल ने बताया कि उन्होंने 19 मार्च को पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी की थी। अप्रैल के पहले सप्ताह में उन्हें बालीगंज पुलिस स्टेशन से फोन कर वोटर आईडी के साथ उपस्थित होने के लिए कहा गया। जब उन्होंने बताया कि SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है तो पुलिस ने आधार कार्ड मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र और कोलकाता के पते का यूटिलिटी बिल समेत कई दस्तावेज मांगे जिन्हें उन्होंने जमा भी कर दिया।

राजगोपाल के अनुसार उन्होंने वर्ष 2005 में इसी कोलकाता पते से अपना पासपोर्ट बनवाया था और 2015 में उसी पते पर उसका नवीनीकरण भी कराया था। इसके बावजूद इस बार कई सप्ताह तक कोई प्रगति नहीं हुई। बाद में पुलिस ने बताया कि उनका मामला कोलकाता पुलिस की स्पेशल ब्रांच के तहत आने वाले सिक्योरिटी कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (SCO) को भेज दिया गया है।

राजगोपाल का दावा है कि SCO अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनका नाम दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो जाता तब तक पुलिस वेरिफिकेशन पूरा नहीं किया जाएगा। जब उन्होंने इस संबंध में किसी लिखित आदेश की जानकारी मांगी तो उन्हें बताया गया कि यही मौजूदा प्रक्रिया है और इसका पालन करना होगा।

इसके बाद राजगोपाल ने कोलकाता पुलिस आयुक् राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और पासपोर्ट सेवा शिकायत प्रकोष्ठ से भी संपर्क किया। 17 जून को उन्हें क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से ईमेल और पत्र प्राप्त हुआ जिसमें बताया गया कि पुलिस रिपोर्ट में उनके वोटर लिस्ट से नाम हटने का उल्लेख किया गया है। साथ ही उन्हें 17 जुलाई को क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।

राजगोपाल का कहना है कि उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा मान्य दस्तावेजों में शामिल अपना मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र भी जमा किया था लेकिन इसके बावजूद उनका नाम अब तक मतदाता सूची में बहाल नहीं किया गया। इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील ट्रिब्यूनल में लंबित है और सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। उनका कहना है कि जब तक वोटर लिस्ट और पासपोर्ट दोनों मामलों में निर्णय नहीं हो जाता तब तक वह अनिश्चितता की स्थिति में हैं।

इस पूरे मामले को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।