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कपाली ओपी में आदिवासी महिला से कथित मारपीट मामले में कार्रवाई की मांग तेज, सामाजिक संगठनों ने एसपी को सौंपा ज्ञापन…

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कपाली ओपी में पूछताछ के दौरान एक आदिवासी महिला के साथ कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार के मामले को लेकर सामाजिक संगठनों, आदिवासी संगठनों और महाली समाज के प्रतिनिधियों ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। रविवार को प्रतिनिधिमंडल ने सरायकेला-खरसावां की पुलिस अधीक्षक को पुनः ज्ञापन सौंपकर मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने और आरोपित पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग की।

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प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि 15 जून 2026 को कपाली ओपी में पूछताछ के नाम पर आदिवासी महिला अल्पना महाली को बुलाया गया जहां उनके साथ कथित रूप से बर्बर मारपीट की गई। इस घटना में महिला को गंभीर शारीरिक चोटें आईं और वर्तमान में उनका इलाज जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में चल रहा है।

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संगठनों के अनुसार घटना के बाद 17 जून को पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। उस समय उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया था लेकिन घटना के सात दिन बाद भी न तो किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही कोई कानूनी कार्रवाई की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि पीड़िता के परिजनों ने चांडिल थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रयास किया लेकिन वहां भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसे उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया और कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत के विपरीत बताया।

ज्ञापन में मांग की गई है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। साथ ही अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई मामले की स्वतंत्र जांच, पीड़िता एवं उसके परिवार को सुरक्षा तथा एफआईआर दर्ज करने से इनकार करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाए।

सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन को सात दिनों का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आदिवासी समाज और विभिन्न जनसंगठन लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे।

ज्ञापन सौंपने वालों में दिनकर कच्छप, शंकर माहली, सत्य नारायण मुर्मू, आकाश महतो, नारायण महतो, राहुल माहली, महावीर लोहार, अजय जामुदा, शिवनाथ बेसरा, संग्राम मार्डी, प्रकाश महतो समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता, आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि और जनसंगठनों के सदस्य शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने एक स्वर में मांग की कि पीड़िता अल्पना महाली को शीघ्र न्याय दिलाया जाए, दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई हो तथा मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाए।