3 साल की मासूम से दरिंदगी और हत्या के दोषी को फांसी, महज 2 महीने में आया ऐतिहासिक फैसला

PUNE : महाराष्ट्र के पुणे में तीन साल की मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 65 वर्षीय दोषी भीमराव कांबले को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का मामला मानते हुए कहा कि आरोपी की उम्र भी सजा में राहत का आधार नहीं हो सकती। घटना के करीब दो महीने के भीतर फैसला आने को न्यायिक प्रक्रिया की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
यह दर्दनाक घटना 1 मई 2026 को पुणे जिले के नसरापुर गांव में हुई थी। गर्मी की छुट्टियों में अपनी नानी के घर आई तीन वर्षीय बच्ची को आरोपी खाने की चीज और नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर अपने साथ ले गया। आरोप है कि उसने एक शेड में बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में भारी आक्रोश फैल गया था।
पुलिस ने मामले की तेजी से जांच करते हुए महज 15 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर दी। फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के बाद 25 जून को आरोपी को दोषी ठहराया गया और 29 जून को उसे फांसी की सजा सुनाई गई।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता बेहद मासूम और असहाय थी तथा उसके साथ अत्यंत क्रूर अपराध किया गया। अभियोजन पक्ष ने CCTV फुटेज, DNA रिपोर्ट, मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्य, पोटेंसी टेस्ट समेत वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ 55 गवाहों की गवाही पेश की, जिससे अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के सभी आरोप सिद्ध हुए।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अजय मिसर ने दोषी को फांसी की सजा देने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के 12 महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया। फैसले के बाद उन्होंने इसे महाराष्ट्र का एक ऐतिहासिक निर्णय बताया।
फैसले का विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने स्वागत किया। एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने पुणे ग्रामीण पुलिस की त्वरित जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट की सुनवाई की सराहना करते हुए कहा कि दोषी को जल्द सजा मिलना समाज में कड़ा संदेश देने के लिए जरूरी है। हालांकि सजा का क्रियान्वयन कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होगा।

