Ease My Deal’ ऐप के नाम पर साइबर ठगी का नया जाल! कैशबैक का लालच देकर खाते से उड़ाए जा रहे पैसे

Jamtara and Giridih : साइबर अपराध के लिए कुख्यात जामताड़ा में ठगी का एक नया तरीका सामने आया है। साइबर अपराधी अब लोगों को कैशबैक का लालच देकर उनके बैंक खातों से रकम उड़ाने की साजिश रच रहे हैं। इस पूरे नेटवर्क का खुलासा पुलिस की कार्रवाई के बाद हुआ है।
गिरिडीह के साइबर डीएसपी अमित रविदास ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर जामताड़ा पुलिस ने करमाटाड़ थाना क्षेत्र में छापेमारी कर तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान समीम अंसारी (24), कैफ अंसारी (19) और मुस्तकीम अंसारी (38) के रूप में हुई है। उनके कब्जे से 6 मोबाइल फोन और 4 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी समीम और कैफ अंसारी कथित तौर पर ‘Ease My Deal’ ऐप का इस्तेमाल कर लोगों के PhonePe अकाउंट पर ₹1999 कैशबैक का आकर्षक मैसेज भेजते थे। कई लोग इसे असली ऑफर समझकर लिंक पर क्लिक कर देते थे। इसके बाद साइबर ठग खातों से रकम ट्रांसफर कर लेते थे।
जांच में पता चला कि ठगी से हासिल पैसे का इस्तेमाल ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड खरीदने में किया जाता था जिन्हें बाद में कमीशन पर बेच दिया जाता था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।
गिरफ्तार तीसरा आरोपी मुस्तकीम अंसारी खुद को State bank of India (SBI) का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करता था। वह पीड़ितों को कहता था कि उनका क्रेडिट कार्ड जल्द बंद होने वाला है और उसे सक्रिय रखने के लिए कुछ जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इसके बाद वह लोगों से एक APK file डाउनलोड करवाता था। पुलिस के अनुसार यह फाइल जासूसी सॉफ्टवेयर की तरह काम करती थी। फाइल इंस्टॉल होते ही कार्ड नंबर ओटीपी और अन्य गोपनीय जानकारियां अपराधियों तक पहुंच जाती थीं जिसके बाद खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मुस्तकीम अंसारी का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और वह साइबर ठगी के मामलों में आरोपी रह चुका है। पुलिस अब उसके पुराने नेटवर्क संपर्कों और अन्य संभावित सहयोगियों की भी जांच कर रही है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक कैशबैक ऑफर या बैंक अधिकारी बनकर आने वाले कॉल पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। साथ ही किसी भी स्थिति में APK फाइल डाउनलोड न करें और ओटीपीट बैंकिंग विवरण या कार्ड संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।


