ओलंपिक में 130 साल पुरानी परंपरा खत्म: अब हर एथलीट को मिलेंगे 10 हजार डॉलर, मेडल जरूरी नहीं

NEW DELHI: इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) ने ओलंपिक इतिहास में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करते हुए 130 साल पुरानी परंपरा को समाप्त कर दिया है। अब ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाले हर एथलीट को 10,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 8.5 लाख रुपये) की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि “फिट फॉर द फ्यूचर ओलंपियन ग्रांट” योजना के तहत प्रदान की जाएगी।
अब तक ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को केवल पदक जीतने या अपने देश की ओर से मिलने वाले पुरस्कारों पर निर्भर रहना पड़ता था। IOC की ओर से पहली बार सभी प्रतिभागी एथलीट्स के लिए सीधी आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है।
इस नई योजना की शुरुआत 2026 विंटर ओलंपिक से हो चुकी है। खास बात यह है कि यह राशि हर एथलीट को मिलेगी चाहे वह पदक जीते या नहीं। केवल ओलंपिक में भागीदारी के आधार पर खिलाड़ियों को यह ग्रांट प्रदान की जाएगी।
IOC के अनुसार इस योजना का उद्देश्य खिलाड़ियों के खेल करियर को मजबूती देना और खेल से संन्यास के बाद करियर परिवर्तन में उनकी मदद करना है।

IOC ने इस योजना के लिए 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 850 करोड़ रुपये) का विशेष फंड बनाया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक IOC एथलीट्स कमीशन के अध्यक्ष और स्पेन के पूर्व बास्केटबॉल खिलाड़ी पाउ गैसोल ने कहा कि यह योजना केवल पदक विजेताओं या समृद्ध देशों के खिलाड़ियों के लिए नहीं है।
उन्होंने कहा “हर ओलंपियन वर्षों की मेहनत त्याग और सपनों के भरोसे इस मंच तक पहुंचता है। उनकी यात्राएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन हर खिलाड़ी ने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत कुछ कुर्बान किया है।”
2028 में होने वाले लॉस एंजेलिस ओलंपिक में करीब 11 हजार एथलीट्स के भाग लेने की उम्मीद है। इनके लिए लगभग 11 करोड़ डॉलर (करीब 920 करोड़ रुपये) का ग्रांट फंड निर्धारित किया गया है।
हालांकि खिलाड़ियों को यह राशि ओलंपिक समाप्त होने के बाद तभी मिलेगी जब वे डोपिंग जांच में क्लीन पाए जाएंगे।
पाउ गैसोल ने कहा“यह केवल पैसा नहीं बल्कि खिलाड़ियों के लिए एक मजबूत समर्थन प्रणाली है। यह सभी एथलीट्स की जीत है।”
आज के दौर में खेलों में करियर बनाना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। ट्रेनिंग कोचिंग उपकरण यात्रा और विशेष डाइट पर खिलाड़ियों को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। आर्थिक तंगी के कारण कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बीच में ही अपना खेल करियर छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि IOC की यह पहल खासतौर पर छोटे देशों और सीमित संसाधनों वाले खिलाड़ियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
यह फैसला IOC की नई अध्यक्ष की खेल-केंद्रित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। खिलाड़ियों से मिले फीडबैक और समीक्षा के बाद IOC ने यह कदम उठाया है। समीक्षा में सामने आया था कि एथलीट्स चाहते हैं कि उन्हें केवल प्रतियोगिता के दौरान ही नहीं बल्कि पूरी ओलंपिक यात्रा और उसके बाद भी सीधा सहयोग मिले।
IOC का यह फैसला ओलंपिक इतिहास में खिलाड़ियों के हित में उठाए गए सबसे बड़े कदमों में से एक माना जा रहा है।

