तमिलनाडु गैस लीक हादसा: झारखंड के 40 प्रवासी मजदूरों ने लगाया बंधक बनाने का आरोप, हेमंत सरकार ने लिया संज्ञान

RANCHI : तमिलनाडु के तिरुवल्लूर स्थित सेंट पीटर्स पॉल सीफूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में अमोनिया गैस रिसाव की घटना के एक सप्ताह बाद भी झारखंड के प्रवासी मजदूरों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें धनबाद की प्रीति देवी भी शामिल हैं। वहीं फैक्ट्री में कार्यरत झारखंड के करीब 40 आदिवासी जदूरों ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद से उन्हें एक निजी भवन के हॉल में रोककर रखा गया है और बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
हादसे में 83 मजदूर घायल हुए थे जिनमें कई अब भी अस्पताल में इलाजरत हैं। धनबाद के मजदूर बबलू कुमार ने बताया कि जिस भवन में उन्हें रखा गया है वहां 25 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी अस्पताल में भर्ती है लेकिन उनसे मिलने के लिए भी पुलिस की निगरानी में ले जाया जाता है और कुछ ही मिनटों बाद वापस उसी हॉल में लाकर रखा जाता है।
वहीं चाईबासा की 18 वर्षीय चुंदरी पिंगुआ जो अपनी बहन के साथ वहां फंसी हैं, ने सवाल उठाया कि आखिर उन्हें इस तरह क्यों रोका गया है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें भोजन तो मिल रहा है लेकिन स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति नहीं है जिससे वे खुद को बंधक जैसा महसूस कर रहे हैं
प्रभावित मजदूरों ने हॉल के भीतर से एक वीडियो जारी कर अपनी स्थिति बताई और झारखंड सरकार से सुरक्षित वापसी की अपील की। उनका कहना है कि ओडिशा के करीब 70 मजदूरों को उनकी राज्य सरकार वापस ले जा चुकी है जबकि असम के मजदूरों की भी वापसी की तैयारी चल रही है लेकिन झारखंड के मजदूर अब भी वहीं फंसे हुए हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड प्रवासी श्रमिक सेल को प्रभावित मजदूरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। श्रम विभाग के अनुसार तिरुवल्लूर की जिला कलेक्टर एस. कविता से लगातार संपर्क किया जा रहा है और जल्द ही सभी मजदूरों को सुरक्षित झारखंड लाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मजदूरों ने यह भी मांग की है कि तमिलनाडु छोड़ने से पहले कंपनी और स्थानीय प्रशासन गैस रिसाव से प्रभावित सभी श्रमिकों को उचित मुआवजा दे और उनकी कई महीनों से लंबित मजदूरी का भुगतान तत्काल सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि बकाया भुगतान और मुआवजे के बिना वे वापस नहीं लौटना चाहते।

