झारखंड शहरी राजनीति: चावल-आटे की बोरी का वजन बढ़ा और व्यापारी भी हुए विद्रोही…

Jharkhand: झारखंड में हाल ही में माल और सामान पर टैक्स को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कहा जा रहा है कि अब तक जो लोग टैक्स चुका चुके हैं उनका नुकसान तो वापस नहीं आएगा लेकिन भविष्य में उनके खर्चे कम हो सकते हैं। इतिहास में यह टैक्स इसलिए याद रखा जाएगा कि इससे चावल और आटे की बोरी का वजन एक किलो बढ़ गया। लोग अब भी यह समझने की कोशिश करेंगे कि 50 किलो का आधा 26 किलो कैसे हो गया।
वहीं व्यापारियों में भी नाराजगी देखने को मिली। चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई व्यापारी विद्रोही तेवर अपनाकर सामने आए। कुछ नामवर व्यापारी पहले भी जोर-जोर से टेबल पीट चुके हैं और इस बार उन्होंने प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
दूसरी ओर बयानबाजी का दौर भी जारी है। राष्ट्रीय या राज्य स्तर के नेताओं के बयान तो समझ में आते हैं लेकिन नगर निकाय या पंचायत स्तर के नेताओं के बयान अक्सर हास्यास्पद लगते हैं। इस तरह के नेताओं को ‘बयानहोड़’ कहा जाने लगा है।
साथ ही शहर में काम और क्रेडिट के मामले में भी उलझन बनी हुई है। कोई भी नई उपलब्धि हो उसका क्रेडिट अक्सर एक ही पक्ष को जाता है। पिछले पांच सालों में जो भी काम जनता तक पहुंचा उसमें कई प्रयास अब भी अधूरे हैं।
झारखंड में यह सभी घटनाएं शहर के नागरिकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं क्योंकि टैक्स, व्यापारी नाराजगी और बयानबाजी का असर आम जनता पर भी पड़ता है।

