Jharkhand: खासमहल नीति-2025 से खासमहल भूमि की लीज और बंदोबस्ती होगी आसान, सलामी दर में भी कमी…
झारखंड सरकार खासमहल भूमि की लीज, बंदोबस्ती, हस्तांतरण और नवीकरण की प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक बनाने के लिए नई खासमहल नीति-2025 तैयार कर रही है। नई नीति का ड्राफ्ट संबंधित विभागों को भेजा जा चुका है। विभागों की मंजूरी के बाद इसे कैबिनेट में रखा जाएगा।
नई नीति के प्रमुख फायदे:
•खासमहल भूखंडों की जटिलताओं को सरल बनाया जाएगा।
•लीज बंदोबस्ती उपायुक्त और आयुक्त स्तर से की जा सकेगी।
•पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन निगरानी के साथ कंप्यूटरीकृत होगी।
•खेती, आवास और व्यावसायिक उपयोग के लिए जमीन का उपयोग आसान होगा।
•सरकार को एकमुश्त राजस्व प्राप्ति का लाभ मिलेगा।
नई नीति में खासमहल भूमि की लीज बंदोबस्ती के लिए सलामी दर में कमी लाई जा सकती है। आवासीय भूमि पर एक से डेढ़ प्रतिशत तक सलामी वसूल कर लीज नवीकरण किया जा सकेगा। वर्तमान में यह दर लीज नवीकरण में 150 से 180 प्रतिशत तक पहुंच जाती है जबकि नई नीति में इसे अधिकतम 30 प्रतिशत के आसपास रखा जा सकता है।
झारखंड के प्रमुख दस जिलों में खासमहल भूमि फैली है जिनमें साहिबगंज, रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, पलामू, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, गिरिडीह और चतरा शामिल हैं। इन जिलों में लगभग 583 एकड़ खासमहल भूमि है।
•10,500 से अधिक लीजधारकों के नाम पर बंदोबस्त किया गया है।
•लगभग 9,500 लीजधारक आवासीय श्रेणी के हैं।
•वर्तमान में कई लीज नवीकरण लंबित हैं या भू-विवाद चल रहे हैं।
•नवीकरण लंबित होने से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।
नई नीति का उद्देश्य खासमहल भूमि की लीज प्रक्रिया को त्वरित, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाना है। हालांकि, लंबे समय से नवीकरण न होने और अतिक्रमण के कारण कुछ जगहों पर कब्जा देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
खासमहल जमीन अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। इसे शहरों के विकास के लिए रैयतों और गैर मजरूआ जमीन से शामिल किया गया था। सरकार के पास इसका मालिकाना हक है और 1980 के दशक में इसे लोगों और संस्थानों को लीज पर दिया गया था।


