झारखंड में बनेगा विस्थापन और पुनर्वास आयोग, आदिवासियों व प्रभावित परिवारों को मिलेगा फायदा…

Jharkhand: झारखंड सरकार ने राज्य में विस्थापन और पुनर्वास आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। यह आयोग विकास परियोजनाओं से उजड़े परिवारों के पुनर्वास और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करेगा। खनन, बांध निर्माण और औद्योगिक परियोजनाओं के चलते अब तक लाखों लोग अपनी जमीन और आजीविका खो चुके हैं खासकर आदिवासी और ग्रामीण समुदाय।
सरकार का कहना है कि इस आयोग के गठन से इन परिवारों के दर्द को समझकर उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ दिलाने में मदद मिलेगी।
आयोग की संरचना इस प्रकार होगी इसमें एक अध्यक्ष दो सदस्य और तीन आमंत्रित सदस्य होंगे। अध्यक्ष के लिए विस्थापन और पुनर्वास या सामुदायिक विकास के क्षेत्र में कम से कम दस साल का अनुभव जरूरी होगा। इसके अलावा, प्रशासनिक सेवा का अनुभव रखने वाले अधिकारी और सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश या 40 वर्ष से अधिक आयु के अधिवक्ता भी सदस्य बनाए जा सकते हैं।
आयोग का काम विस्थापित परिवारों का सामाजिक-आर्थिक अध्ययन कराना और उसी आधार पर पुनर्वास योजनाएं तैयार करना होगा।
यह कदम न सिर्फ सामाजिक न्याय की दिशा में अहम है बल्कि आदिवासी और अन्य हाशिए पर रहने वाले समुदायों को मजबूत बनाने की ओर भी है। झामुमो सरकार का मानना है कि आयोग से विकास और सामाजिक समावेश के बीच संतुलन स्थापित होगा।
हालांकि आयोग के सामने बड़ी चुनौती विस्थापितों की सही पहचान पारदर्शिता बनाए रखना और योजनाओं को समय पर लागू करना होगा।
परिवारों को शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी और आने वाले समय में विकास परियोजनाओं से जुड़े विरोध और असंतोष को भी कम किया जा सकेगा।


