आखिर झारखंड में क्यों अटक गए आयुष्मान भारत के भुगतान?

Jharkhand: सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं देने की इच्छा से वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रांची से शुरू की गई आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) आज झारखंड में लगभग ठप हो चुकी है। राज्य के 750 अस्पतालों में से 212 को पिछले जून से और बाकी 538 को इस वर्ष फरवरी से अब तक भुगतान नहीं मिला है जिससे योजनाओं पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
अब तक झारखंड में 23 लाख से अधिक लोगों ने इस योजना के तहत इलाज कराया है लेकिन 190 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि ने अस्पतालों को परेशान कर दिया है। हजारीबाग, कोडरमा, पलामू और देवघर जैसे जिलों के कई अस्पतालों ने योजना से खुद को अलग कर लिया है।
योजना के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मिलता है। फिलहाल झारखंड में करीब 28 लाख परिवार इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत हैं और राज्य सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 38 लाख परिवार और जुड़े हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय संकट नहीं है बल्कि पिछले साल से भुगतान की प्रक्रिया ही रुक गई है। पिछले 7 वर्षों में सरकार द्वारा अस्पतालों को 2,284 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।पिछले वर्ष नेशनल एंटी फ्रॉड यूनिट (NAFU) ने AI के जरिए 212 अस्पतालों (180 निजी और 32 सरकारी) को अनियमितताओं के आरोप में चिह्नित किया। इसके बाद इन अस्पतालों के भुगतान रोक दिए गए और मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पास भेजा गया। अप्रैल 2025 में रांची के अशोक नगर पीपी कंपाउंड और लालपुर समेत 21 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी हुई।
CAG की रिपोर्ट में ‘भूतिया लाभार्थियों’ और जालसाजी की बात सामने आने के बाद यह जांच शुरू हुई है। जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक संबंधित अस्पतालों को भुगतान नहीं मिलेगा।
बाकी अस्पतालों के भुगतान भी रुकेहैरानी की बात यह है कि जिन 538 अस्पतालों पर किसी तरह की अनियमितता का आरोप नहीं है उनके भुगतान भी फरवरी 2025 से रुके हुए हैं। इससे राज्यभर के अस्पतालों में रोष है और योजना पर भरोसा डगमगाने लगा है।

