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कोल्हान में हाथियों के दुश्मन कौन? तीन दिन में चार हाथियों की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल…

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Jharkhand: झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में बीते तीन दिनों में चार हाथियों की मौत ने वन्यजीव सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में दो हाथियों की मौत हुई जिनमें से एक मादा हाथी नक्सलियों द्वारा बिछाए गए IED विस्फोट में घायल हुई थी और इलाज के अभाव में तड़पती रही। दूसरी घटना में चाईबासा के टोंटो प्रखंड में एक 45 वर्षीय दंतैल हाथी मृत अवस्था में मिला जिसकी मौत का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

इसके अलावा चार दिन पहले सारंडा में ही एक नन्हे हाथी की भी मौत IED विस्फोट में हुई थी। इन घटनाओं के बाद वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों ने कोल्हान क्षेत्र में हाथियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।

हाथियों की मौत के संभावित कारण—
•नक्सली गतिविधियां: जंगलों में बिछाए गए आईईडी केवल सुरक्षा बलों के लिए ही नहीं वन्यजीवों के लिए भी घातक सिद्ध हो रहे हैं।


•अज्ञात और प्राकृतिक कारण: कई बार हाथियों की मौत के पीछे बीमारी या उम्र भी कारण बनते हैं जिसकी पुष्टि पोस्टमार्टम के बाद ही हो सकती है।

•मानव-हाथी संघर्ष: जंगलों की कटाई और कृषि विस्तार के कारण हाथी आबादी वाले इलाकों में घुसते हैं जहां उनकी जान को खतरा होता है।


•अवैध शिकार: भले ही इन मामलों में इसका सीधा प्रमाण नहीं है लेकिन हाथी दांत की तस्करी आज भी एक बड़ा खतरा है।

वन विभाग को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हाथियों की सुरक्षा के लिए विशेष रणनीति बनानी चाहिए। साथ ही सभी मौतों की गहन जांच जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें। हाथियों के लिए सुरक्षित गलियारे बनाना और मानव-हाथी संघर्ष को कम करना समय की मांग है।