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स्टूडेंट्स आत्महत्या पर सुप्रीम कोर्ट सख्त!! कहा- ‘ये सिस्टम की नाकामी’, 90 दिन में रिपोर्ट और गाइडलाइंस लागू…

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Azad Reporter desk: देश में छात्रों द्वारा आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इसे व्यवस्था की विफलता बताया और केंद्र सरकार को 90 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों के लिए 15 नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

इन गाइडलाइंस में संस्थानों में काउंसलर-छात्र का अनुपात सुनिश्चित करना, मानसिक स्वास्थ्य नीति लागू करना और शिक्षकों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना शामिल है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि देश में छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सिर्फ 2022 में 1,70,924 आत्महत्याओं में से 13,044 छात्र थे। इनमें 2,248 मौतें परीक्षा में असफलता के कारण हुईं।

NCRB के आंकड़ों के मुताबिक 2001 में जहां 5,425 छात्रों ने आत्महत्या की थी वहीं 2022 में यह संख्या बढ़कर 13,044 हो गई।

कोर्ट ने कहा कि पढ़ाई का दबाव, मानसिक तनाव और संस्थानों की असंवेदनशीलता जैसे कारण युवाओं की जान ले रहे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार जब तक इस पर कानून नहीं बनाती तब तक ये गाइडलाइंस लागू रहेंगे।