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पाकुड़ नक्सली हमला: दो दोषियों की फांसी पर झारखंड हाईकोर्ट में मतभेद, मामला अब नई बेंच को सौंपा जाएगा…

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Jharkhand: 2013 में पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार और 5 अन्य पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में झारखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अलग-अलग राय दी है। ट्रायल कोर्ट ने जिन दो आरोपियों सुखलाल उर्फ प्रवीर दा और सनातन बास्की उर्फ ताला दा को मौत की सजा सुनाई थी उसी सजा पर हाईकोर्ट के दो जजों की राय नहीं मिल पाई।

न्यायमूर्ति रोंगन मुखोपाध्याय ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया जबकि न्यायमूर्ति संजय प्रसाद ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए फांसी की सजा को बरकरार रखा। अब यह मामला झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया है जो इसे किसी नई बेंच को सौंपेंगे। नई बेंच ही अब अंतिम फैसला सुनाएगी।

30 जुलाई 2013 को पाकुड़ में एसपी अमरजीत बलिहार का काफिला एक पुलिया के पास जैसे ही धीमा हुआ 25-30 नक्सलियों ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में एसपी समेत 6 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा दी थी। दोनों ने इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी।

उन्होंने कहा कि पुलिस की जांच में कई गंभीर खामियां थीं। अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपियों ने ही यह हमला किया। गवाहों के बयान मेल नहीं खाते और आरोपियों की पहचान को लेकर भी संदेह है। उन्होंने पहचान परेड (TIP) को गलत प्रक्रिया बताया।

उन्होंने कहा कि यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित था। आरोपी सनातन बास्की ने खुद कबूल किया कि उसने गोली चलाई थी। साथ ही, एसपी के बॉडीगार्ड ने प्रवीर दा की पहचान की थी जो इस केस को मजबूत बनाता है।

अब नई बेंच इस बहुचर्चित और संवेदनशील मामले पर अंतिम फैसला सुनाएगी।