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झारखंड की जेलों में लापरवाही! 20 जेलों में क्लर्क बना जेलर, अधिकारी कर रहे सिर्फ कागजी काम…

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Jharkhand: झारखंड की जेल व्यवस्था में बड़ी लापरवाही सामने आई है। राज्य की 31 जेलों में से 20 जेल ऐसे हैं जहां जेलर की जिम्मेदारी क्लर्क यानी लिपिक स्तर के कर्मचारियों के पास है। जबकि नियम के अनुसार ये जिम्मेदारी सिर्फ वर्दीधारी अधिकारियों की होनी चाहिए।

झारखंड जेल मैनुअल 2025 में साफ कहा गया है कि जेलर और सहायक जेलर जैसे पदों पर सिर्फ ट्रेनिंग प्राप्त वर्दीधारी अफसर ही नियुक्त हो सकते हैं। इसके बावजूद कई जेलों में क्लर्क, कंप्यूटर ऑपरेटर और जूनियर जेलर जैसे कर्मचारियों को जेल चलाने का काम दिया गया है।

इन जेलों में क्लर्क चला रहे जेल:
दुमका, सिमडेगा, लातेहार, गढ़वा, कोडरमा, धनबाद, चतरा, लोहरदगा, पाकुड़, गोड्डा, जामताड़ा, साकची, रामगढ़, खूंटी, घाटशिला, मधुपुर, राजमहल, बरही और हजारीबाग की ओपन जेल में भी लिपिक या दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी ही जेल संभाल रहे हैं।

डालटनगंज, चास और तेनुघाट की जेलों में कंप्यूटर ऑपरेटर को जेलर की जिम्मेदारी दी गई है।

होटवार, घाघीडीह, हजारीबाग, गुमला और सरायकेला जैसी जेलों में असिस्टेंट जेलर (सहायक कारापाल) को अस्थायी रूप से जेलर का चार्ज दिया गया है।

राज्य में सिर्फ तीन जेलों में ही नियम के अनुसार नियुक्त जेलर काम कर रहे हैं –

  1. देवघर – प्रमोद कुमार
  2. गिरिडीह – धर्मशीला कुमारी
  3. चाईबासा – अजय कुमार श्रीवास्तव

झारखंड जेल मेंस एसोसिएशन ने इस पर विरोध जताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि योग्य कक्षपालों को प्रमोशन नहीं दिया जा रहा जबकि अनुभवहीन लिपिकों को जेलर बनाया जा रहा है जो नियमों के खिलाफ है।

यह स्थिति राज्य की जेल प्रणाली की गंभीर अनदेखी को दिखाती है और इससे सुरक्षा व संचालन पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।