जमशेदपुर में लंबे समय से चल रहे सोशल मीडिया केस में ख़ालिद मजीद बाइज्ज़त बरी…

Jamshedpur news: वर्ष 2020 के एक बहुचर्चित सोशल मीडिया मामले में मंगलवार को जमशेदपुर के माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-2 की अदालत ने ख़ालिद मजीद को सभी आरोपों से बाइज्ज़त बरी कर दिया।
यह मामला 3 अप्रैल 2020 को जमशेदपुर साइबर थाना (बिष्टुपुर) में प्रोबेशनर अवर निरीक्षक महेन्द्र महतो द्वारा दर्ज किया गया था। साइबर थाना प्रभारी को यह जानकारी सुमन कुमार नामक व्यक्ति द्वारा दी गई थी जिन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड पुलिस के ट्विटर हैंडल पर शिकायत की थी। इस सूचना के आधार पर महेन्द्र महतो ने कांड संख्या 20/2020 दर्ज किया था।
FIR के अनुसार अभियुक्त द्वारा सोशल मीडिया पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं जिसमें धार्मिक भावनाओं के खिलाफ अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया गया था। इन पोस्टों को लेकर भारतीय दंड संहिता की धाराएं 188, 295A, 153A तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं 66(E)/67 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 6 गवाहों की गवाही कराई गई जिनमें पुलिस निरीक्षक महेंद्र महतो, थाना प्रभारी उपेंद्र कुमार मंडल, पुलिस निरीक्षक रेणु गुप्ता, दीपक कुमार, किशोर रामसे और पैरो महतो शामिल थे।
हालांकि अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष किसी भी आरोप को पुख्ता साक्ष्यों से साबित नहीं कर पाया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आरोप न्यायिक कसौटी पर खरे नहीं उतरते और अभियुक्त को संदेह का लाभ देते हुए पूर्ण रूप से बरी किया जाता है।
इस केस में ख़ालिद की तरफ से अधिवक्ता मो. ज़ाहिद इक़बाल ने मजबूती से पैरवी की। उन्होंने अदालत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और सबूतों की कमी के आधार पर दलीलें रखीं, जो अदालत को संतुष्ट करने में सफल रहीं।
यह फैसला इस बात का उदाहरण है कि देश की न्याय व्यवस्था साक्ष्य और कानून के आधार पर फैसले देती है और जब तक कोई आरोप साबित न हो तब तक किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।


