झारखंड का स्वास्थ्य मॉडल अब असम में भी लागू, अस्पताल अब बकाया बिल के नाम पर शव नहीं रोक सकेंगे…

Azad Reporter desk: झारखंड सरकार द्वारा लागू की गई एक मानवीय और संवेदनशील स्वास्थ्य नीति को अब असम सरकार ने भी अपनाया है। इस नीति के तहत राज्य के किसी भी अस्पताल को अब बकाया बिल के नाम पर मृत व्यक्ति के शव को परिजनों को सौंपने से मना करने का अधिकार नहीं होगा।
यह पहल झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी द्वारा जून 2025 में की गई थी। डॉ. अंसारी ने स्पष्ट आदेश जारी किया था कि किसी भी परिस्थिति में अस्पताल मरीज की मृत्यु के बाद शव को रोक कर नहीं रख सकता। इस फैसले का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा उपलब्ध कराना है।
इस आदेश के बाद झारखंड के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देशित किया गया कि यदि मरीज की मृत्यु हो जाती है तो शव को बिना किसी देरी के परिजनों को सौंप दिया जाए चाहे अस्पताल का कोई बकाया भुगतान बाकी हो या नहीं। डॉ. इरफान अंसारी ने स्वयं कई अस्पतालों का दौरा कर इस आदेश के क्रियान्वयन की निगरानी की और अस्पताल प्रबंधन से संवाद भी किया।
अब असम सरकार ने भी इसी मॉडल को अपनाते हुए अपने राज्य में इसी प्रकार का आदेश लागू किया है। यह निर्णय सामाजिक मानवीय और प्रशासनिक दृष्टिकोण से अत्यंत सराहनीय माना जा रहा है।
डॉ. इरफान अंसारी ने इस निर्णय को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा “यह निर्णय कांग्रेस पार्टी की सेवा भावना और मानवीय संवेदनशीलता से प्रेरित है। हमारा उद्देश्य हर वर्ग के लोगों को सम्मानजनक अंतिम विदाई दिलाना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यह झारखंड के लिए गर्व की बात है कि उसकी नीति को अब अन्य राज्य भी अपनाने लगे हैं।

