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टाटानगर स्टेशन पर नन और आदिवासी नाबालिगों से हुए पूछताछ पर, झारखंड अल्पसंख्यक आयोग ने लिया संज्ञान…

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झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग (JSMC) ने टाटानगर रेलवे स्टेशन पर एक कैथोलिक नन और 19 आदिवासी नाबालिग बच्चों से कथित तौर पर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सदस्यों द्वारा की गई घंटों की पूछताछ के मामले को गंभीरता से लिया है। आयोग ने इसे अल्पसंख्यकों के साथ उत्पीड़न का मामला बताया है।

जानकारी के मुताबिक शुक्रवार (20 सितंबर) की रात साउथ बिहार एक्सप्रेस से उतरने के बाद नन और बच्चों को स्टेशन पर करीब पाँच घंटे तक रोककर उनसे पूछताछ की गई। आरोप लगाया गया था कि वे बच्चों को मानव तस्करी और धार्मिक परिवर्तन के लिए ले जा रही हैं।

JSMC के उपाध्यक्ष प्रणेश सोलोमन ने कहा कि आयोग इस मामले में जिला उपायुक्त, SSP और रेलवे पुलिस से जवाब मांगेगा कि बिना ठोस सबूत के बच्चों और नन को घंटों क्यों रोका गया। उन्होंने बताया कि आयोग की टीम सितंबर के आख़िरी हफ्ते में जमशेदपुर का दौरा करेगी और अधिकारियों व संबंधित संस्थान से मुलाक़ात करेगी।

पूर्व जनजातीय सलाहकार परिषद सदस्य रतन तिर्की ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्यों ने नाबालिग बच्चों की तस्वीरें और वीडियो उनकी सहमति के बिना सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए।

वहीं सुंदरनगर स्थित ‘सामेकित जन विकास केंद्र’ के निदेशक फादर बिरेन्द्र टेटे ने बताया कि इन 16 लड़कियों और 3 लड़कों को उनके माता-पिता की सहमति से जीवन कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लाया गया था। लेकिन स्टेशन पर हुई घटना के बाद सभी बच्चे डर गए और कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।

इस मामले में GRP की DSP, जयश्री कुजूर ने बताया कि जांच चल रही है लेकिन अब तक मानव तस्करी या धार्मिक परिवर्तन से जुड़ा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।