झारखंड हाईकोर्ट ने सिविल सर्विस परीक्षा की मेरिट लिस्ट पर JPSC को जारी किया नोटिस, गड़बड़ियों को लेकर मांगा जवाब…

Jharkhand: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा की मेरिट लिस्ट पर उठे सवालों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने इस संबंध में JPSC को नोटिस जारी करते हुए मेरिट लिस्ट में संभावित गड़बड़ियों पर Point-wise affidavit दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने यह निर्देश बुधवार को राजेश प्रसाद समेत 54 अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं ने 2024 में जारी परीक्षा के विज्ञापन और नियमावली का हवाला देते हुए मेरिट लिस्ट को चुनौती दी है।
याचिका में कहा गया है कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन कराया गया जबकि परीक्षा नियमावली में इसका कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके अलावा मूल्यांकन कार्य किसी थर्ड पार्टी एजेंसी से करवाया गया, जिसकी पहचान और चयन प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
प्रार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए नियम के अनुसार विश्वविद्यालय या उससे संबंधित कॉलेजों में 10 साल से अधिक अनुभव वाले शिक्षकों या 5 साल से अधिक अनुभव वाले पोस्ट ग्रेजुएट डिग्रीधारी शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए थी। लेकिन इसके स्थान पर मात्र दो वर्षों के अनुभव वाले गेस्ट फैकल्टी से मूल्यांकन कराया गया।
याचिका में मुख्य परीक्षा की मेरिट लिस्ट को निरस्त करने और उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन कराने की मांग की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा का विज्ञापन जनवरी 2024 में जारी किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा मार्च में आयोजित की गई थी जिसमें साढ़े तीन लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इसका परिणाम 22 अप्रैल को जारी किया गया था, जिसमें से 7,011 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हुए। इसके बाद मुख्य परीक्षा 22 से 24 जून के बीच आयोजित हुई और उसका परिणाम 20 मई 2025 को घोषित किया गया।
फिलहाल आयोग ने सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस परीक्षा के माध्यम से कुल 342 पदों पर नियुक्ति की जानी है।

