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झारखंड में IMA ने बनाई नई JDN कमेटियां, चार मेडिकल कॉलेजों को मिला नया नेतृत्व…

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Jharkhand: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) झारखंड ने राज्य के चार प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क (JDN) की नई कमेटियों का गठन किया है। ये कमेटियां 2025 से 2027 के कार्यकाल तक काम करेंगी।

IMA के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ए.के. सिंह ने बताया कि JDN का उद्देश्य डॉक्टरों को स्थानीय स्तर पर सशक्त बनाना है ताकि वे अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रख सकें और उसका समाधान खुद कर सकें।

डॉ. सिंह ने कहा कि साल 2024 में कोलकाता के RG Kar मेडिकल कॉलेज में हुई एक घटना के बाद IMA की राष्ट्रीय इकाई ने सभी राज्यों को JDN कमेटियां सक्रिय करने के निर्देश दिए। इसी दिशा में झारखंड में ये नई नियुक्तियां की गई हैं।

RIMS रांची JDN कमेटी (2025–27)
Convenor: डॉ. आशीष झा
General Secretary: डॉ. सुशांत कुमार शर्मा
State Council Members: डॉ. धीरज सिन्हा, डॉ. बिदित जलान
Co-Convenors: डॉ. अमित कुमार, डॉ. फहमिदा अर्शी, डॉ. तनुग्रिया मोनिका, डॉ. आकांक्षा मिश्रा, डॉ. ऋद्धि सिंह
Joint Secretaries: डॉ. ओंकार कुमार, डॉ. अमन पांडेय, डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. रोहित सिन्हा, डॉ. गौरव मिश्रा
Executive Members: डॉ. सचिन कुमार सहित 12 अन्य डॉक्टर

MGM मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर JDN कमेटी
Convenor: डॉ. विशाल कुमार सिंह
General Secretary: डॉ. अनूप कुमार
Council Members: डॉ. मयंक कुमार सिंह, डॉ. रोशन कुमार
Co-Convenors: डॉ. करण सिंह, डॉ. नैना, डॉ. जय पाठक
Joint Secretaries: डॉ. आयुष राणा सहित 5 अन्य
Executive Members: डॉ. अंकुर पांडेय सहित 20 से अधिक सदस्य

SNMMCH धनबाद JDN कमेटी
Convenor: डॉ. शिवम सिन्हा
General Secretary: डॉ. प्रसाद कुमार
Council Members: डॉ. शुभम तांतुबाई, डॉ. आर्यन गुप्ता
Co-Convenors: डॉ. मयंक कुमार सिंह सहित 2 अन्य
Joint Secretaries: डॉ. चांदनी कुमारी सहित 3 अन्य
Executive Members: डॉ. अक्षत चौधरी सहित 7 अन्य डॉक्टर

AIIMS देवघर JDN कमेटी
Convenor: डॉ. यश सिंह
General Secretary: डॉ. नावेद अहमद मीर
Council Member: डॉ. राज बाबू
Co-Convenors: डॉ. रोहित पांडा, डॉ. सृष्टि संकल्प पांडा
Joint Secretaries: डॉ. आदित्य विश्वकर्मा सहित 2 अन्य
Executive Members: डॉ. लक्ष्मी मुंधरा सहित 7 अन्य डॉक्टर

IMA झारखंड की यह पहल न सिर्फ मेडिकल छात्रों और जूनियर डॉक्टर्स को नेतृत्व और संवाद की शक्ति देगी बल्कि मेडिकल संस्थानों में पारदर्शिता और टीम वर्क की भावना को भी मजबूत बनाएगी।

डॉक्टरों की आवाज अब और बुलंद होगी।