हाईकोर्ट सख्त: RIMS में खाली पदों पर नियुक्ति नहीं होने पर जताई नाराजगी, स्वास्थ्य सचिव और निदेशक तलब…

Jharkhand:झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स (राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में नियुक्ति और मेडिकल उपकरणों की खरीद को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सोमवार को हुई सुनवाई में स्वास्थ्य सचिव और रिम्स निदेशक को 6 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होकर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब नियुक्तियों के लिए विज्ञापन पहले ही जारी हो चुका है तो अब तक डॉक्टरों, प्राचार्यों, प्रोफेसरों, पैरामेडिकल और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पदों पर नियुक्ति क्यों नहीं हो सकी।
याचिका ज्योति शर्मा की ओर से दाखिल की गई है जिसकी सुनवाई के दौरान अधिवक्ता दीपक कुमार दुबे ने अदालत को बताया कि रिम्स में कई चिकित्सक ड्यूटी के समय मौजूद नहीं रहते और निजी प्रैक्टिस में लगे रहते हैं। जबकि उन्हें नॉन प्रैक्टिस एलाउंस (NPA) दिया जाता है। इस पर अदालत ने रिम्स निदेशक को आदेश दिया कि वह ऐसे सभी डॉक्टरों की बायोमेट्रिक उपस्थिति रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि रिम्स को नियमित रूप से फंड दिया जा रहा है लेकिन रिम्स प्रशासन उस फंड को खर्च नहीं कर रहा और वापस लौटा दे रहा है। अदालत ने फंड खर्च न करने जरूरी मेडिकल उपकरण नहीं खरीदने और सरकार द्वारा दी गई राशि का विस्तृत विवरण मांगा है।
रिम्स में इतने पद लंबे समय से खाली:
•डेंटल कॉलेज में प्रोफेसर के 37, एडिशनल प्रोफेसर के 9, एसोसिएट प्रोफेसर के 56, असिस्टेंट प्रोफेसर के 43 पद रिक्त
•नर्सिंग कॉलेज में प्रिंसिपल सहित नर्सिंग स्टाफ (ग्रुप-सी) के 144 पद
•पैरामेडिकल स्टाफ के 44 और चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप-डी) के 418 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं
हाईकोर्ट ने इस पूरी स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट जवाब और जिम्मेदारी तय करने के संकेत दिए हैं। आगामी सुनवाई 6 अगस्त को होगी।


