हेमंत सरकार की बढ़ेगी मुश्किलें : कुड़मी समाज ने पेसा कानून में बाईसी प्रथा शामिल करने की मांग की, दी आंदोलन की चेतावनी…

Jharkhand: झारखंड में पेसा कानून को लेकर कुड़मी समाज ने बड़ा ऐलान किया है। रविवार को रांची के पुराने विधानसभा सभागार में टोटेमिक कुड़मी/कुरमी विकास मोर्चा के बैनर तले एक बड़ी बैठक हुई जिसमें समाज के सैकड़ों लोग, प्रोफेसर, अधिवक्ता और बुद्धिजीवी शामिल हुए।
बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि पेसा कानून को कुड़मी समाज तभी स्वीकार करेगा जब उसमें बाईसी प्रथा को शामिल किया जाएगा। समाज के लोगों ने इसे अपनी प्राचीन परंपरा बताया और कहा कि अगर इसे नजरअंदाज किया गया तो यह कानून काला कानून साबित होगा।
बैठक की अध्यक्षता शीतल ओहदार ने की। प्रमुख वक्ताओं में पूर्व जैक अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार महतो, रांची विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. अमर कुमार चौधरी, अधिवक्ता षष्ठी रंजन महतो, प्रोफेसर मुकुंद चंद मेहता समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।
बाईसी प्रथा कुड़मी समाज की एक पारंपरिक ग्रामीण व्यवस्था है जिसमें गांव के मईड़ला महतो की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जीवंत रूप से लागू है।
इस मांग को आगे बढ़ाने के लिए एक 31 सदस्यीय टीम बनाई गई है। यह टीम बाईसी प्रथा से जुड़ी जानकारी को दस्तावेज के रूप में तैयार कर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह को सौंपेगी।
शीतल ओहदार ने स्पष्ट कहा कि अगर बाईसी प्रथा को पेसा कानून में शामिल नहीं किया गया तो कुड़मी समाज आंदोलन के लिए मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का सवाल है।
बैठक में युवाओं और समाजसेवियों से अपील की गई कि वे गांव-गांव जाकर पेसा कानून के फायदे-नुकसान के बारे में लोगों को बताएं और मईड़ला महतो की भूमिका को समझाएं ताकि बाईसी प्रथा को और मजबूत किया जा सके।


