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ऑनलाइन उपस्थिति नहीं बनाने वाले शिक्षकों से स्पष्टीकरण, शैक्षणिक कार्यों की समीक्षा में कई निर्देश…

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Jharkhand: सोमवार को समाहरणालय स्थित सभागार में उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्यालयों में शैक्षणिक सामग्री जैसे किताब, नोटबुक और बैग वितरण की स्थिति की समीक्षा की गई। उप विकास आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी विद्यालय में वितरण अधूरा नहीं रहना चाहिए। यदि कहीं सामग्री बच जाए तो उसे जरूरतमंद प्रखंडों में स्थानांतरित कर उपयोग में लाया जाए।

पिछले वर्ष की मैट्रिक परीक्षा परिणाम के आधार पर गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषयों में सुधार हेतु निचली कक्षाओं से ही ठोस कार्य योजना लागू करने की बात कही गई। उच्च विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और प्रतिनियोजन से हो रही पढ़ाई में बाधा पर भी चिंता जताई गई और संबंधित विद्यालयों की सूची शीघ्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में नामांकन वृद्धि, ड्रॉपआउट रोकने के लिए विशेष प्रशिक्षण, निर्माण कार्यों की प्रगति, यू-डायस डाटा अपडेट, व्यावसायिक शिक्षा की कक्षाओं का संचालन और विद्यालय प्रबंधन समिति के पुनर्गठन को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में बताया गया कि जिले के लगभग 85% शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं लेकिन चैनपुर, डुमरी और जारी जैसे प्रखंडों में अनुपालन काफी कम है। इस पर डीडीसी ने ऐसे शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। इसके अलावा राज्यस्तरीय सीपीडी प्रशिक्षण पूरा न करने वाले शिक्षकों से भी जवाब तलब करने का आदेश दिया गया।

डीडीसी ने निर्देश दिया कि 16 जुलाई से सभी प्रखंडों में बच्चों के बैंक खातों की एनपीसीआई मैपिंग पूरी की जाए और इसके लिए बैंकों के साथ समन्वय बनाते हुए आवश्यकतानुसार सीआरपी व बीआरपी की प्रतिनियुक्ति की जाए।

नवभारत साक्षरता कार्यक्रम की समीक्षा में गुमला जिले की प्रगति अत्यंत धीमी पाई गई। अब तक केवल 1500 असाक्षर लोगों की पहचान हो सकी है। पालकोट, घाघरा और सिसई प्रखंड की स्थिति सबसे अधिक कमजोर है। इस पर उप विकास आयुक्त ने जुलाई के अंत तक व्यापक पहचान अभियान चलाने और साक्षरता केंद्रों के संचालन में शिक्षकों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही चेतावनी दी कि अगली बैठक तक प्रगति नहीं दिखाने वाले संकुल, प्रखंड व विद्यालयों पर जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी।

प्रोजेक्ट इंपैक्ट के तहत विद्यालयों में मासिक मूल्यांकन और डेटा एंट्री की समीक्षा में पाया गया कि केवल 10% विद्यालयों ने ही प्राप्तांक की ऑनलाइन एंट्री की है। डीडीसी ने एक सप्ताह के भीतर 100% डेटा एंट्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी, जिला परियोजना कार्यालय के सहायक अभियंता, फील्ड मैनेजर, स्टेनोग्राफर, सभी प्रखंडों के शिक्षा पदाधिकारी, कार्यक्रम पदाधिकारी एवं कनीय अभियंता उपस्थित रहे।