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CBSE बोर्ड का नया निर्देश!! प्री-प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक मातृभाषा में पढ़ाई, स्कूलों के सामने कई चुनौतियां…

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Azad Reporter desk: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF 2023) को लागू करने की दिशा में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने देशभर के अपने संबद्ध स्कूलों को सुझाव दिया है कि वे प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 2 तक के छात्रों को मातृभाषा या स्थानीय भाषा में पढ़ाएं। हालांकि इसे एक साथ लागू नहीं किया जाएगा बल्कि स्कूलों को समय और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

CBSE का मानना है कि छोटे बच्चे अपनी मातृभाषा में जल्दी और बेहतर सीखते हैं। यह न केवल उनकी समझ को बेहतर बनाता है बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि वे अपने छात्रों की मातृभाषा की पहचान करें और उसी आधार पर स्टडी मटीरियल, किताबें और पढ़ाने के तरीके तैयार करें।

हालांकि यह बदलाव आसान नहीं है। सीबीएसई की इस पहल के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। खासकर महानगरों और बहुभाषी इलाकों में यह व्यवस्था लागू करना कठिन हो सकता है। जैसे हैदराबाद में 40% से ज्यादा शिक्षक तेलुगु भाषा नहीं जानते। वहीं दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में इतनी भाषाई विविधता है कि किसी एक मातृभाषा का चयन करना मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा किताबों का अनुवाद नए शिक्षकों की नियुक्ति और क्लास रीस्ट्रक्चरिंग भी बड़ी चुनौतियां हैं। एक ही कक्षा में अगर हिंदी, बंगाली और तमिल भाषी बच्चे हों तो अलग-अलग सेक्शन बनाना पड़ सकता है। इससे समय बजट और विशेषज्ञता की जरूरत बढ़ जाती है।

फिर भी CBSE इस बदलाव को शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल मानता है। बोर्ड का लक्ष्य है कि हर बच्चा अपनी शुरुआती शिक्षा उसी भाषा में पाए जिसमें वह सोचता और समझता है। इससे न केवल सीखने की प्रक्रिया आसान होगी बल्कि शिक्षा में समानता और समावेश भी बढ़ेगा।

जुलाई 2025 से लागू करने की तैयारी
CBSE ने स्कूलों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान इस बदलाव की तैयारी शुरू करने की सलाह दी है ताकि जुलाई 2025 से इसे प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।