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7 सालों में झारखंड में प्राकृतिक आपदाओं से 8500+ मौतें, बिजली गिरने से सबसे ज्यादा जानें गईं, देखें ये पूरी रिपोर्ट…

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Jharkhand: झारखंड राज्य हर साल प्राकृतिक आपदाओं का बड़ा दंश झेलता है। बीते 7 वर्षों में यानी 2017-18 से लेकर 2023-24 तक राज्य में विभिन्न आपदाओं के कारण 8676 लोगों की जान चली गई। इनमें सबसे ज्यादा मौतें 2023-24 में दर्ज की गईं जब 1,948 लोग आपदाओं की चपेट में आकर मारे गए।

इन आपदाओं में बिजली गिरना सबसे खतरनाक साबित हुआ जिसकी चपेट में आकर 2010 से अब तक 3147 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं सूखा, बाढ़, चक्रवात, ओलावृष्टि, शीतलहर और आगजनी जैसी घटनाओं ने भी भारी तबाही मचाई है।

जानिए आंकड़ों में आपदा का असर—
•मृतक लोगों की संख्या (2017-24): 8676
•पशुओं की मौत: 4405
•पूरी तरह ध्वस्त घर: 2123
•सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान: ₹12.56 करोड़
•निजी संपत्ति को नुकसान: ₹38.53 करोड़

कृषि क्षेत्र को आपदाओं ने सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया। सिर्फ 2022-23 में ही 230.21 करोड़ रुपये की फसल बर्बाद हुई जो अब तक की सबसे बड़ी क्षति है।
इसके अलावा:
•2018-19 में नुकसान: ₹280.69 करोड़
•2019-20 में नुकसान: ₹19.54 करोड़

सात सालों में कुल मिलाकर 287.43 करोड़ रुपये की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन, असंतुलित बारिश, और तेजी से बदलता पर्यावरणीय चक्र इसके मुख्य कारण हैं। झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में जंगलों की कटाई, अनियोजित विकास और जलस्रोतों की उपेक्षा ने हालात को और बिगाड़ दिया है।

हर साल सूखे के कारण पानी का संकट गहराता जा रहा है। पलामू, लातेहार, गढ़वा और चतरा जैसे जिले सबसे अधिक प्रभावित रहे। यह जल संकट न सिर्फ जीवन को प्रभावित करता है बल्कि किसानों की आजीविका भी छीन लेता है।

अगर बात करें 2025 की तो इस साल भी मानसून ने जोरदार दस्तक दी है। जमशेदपुर में अब तक की सबसे भारी बारिश देखने को मिली है जिससे कई जगहों पर पानी भर गया। कई लोगों की जान गई कई घरों में बाढ़ आ गई और लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। सबसे चिंता की बात यह है कि मानसून का मौसम अभी जारी है और यह कहना मुश्किल है कि आगे और कितनी परेशानियां सामने आएंगी।

राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अनुसार सरकार ने आपदा प्रबंधन के बजट को बढ़ाने की पहल की है। भारत सरकार से बिजली गिरने से पहले अलर्ट देने वाली तकनीक की मांग की गई है। गांवों और पंचायतों तक आपदा चेतावनी प्रणाली और प्राथमिक प्रशिक्षण पहुंचाने की योजना है।

झारखंड जैसे राज्य में आपदा से बचाव सिर्फ राहत टीमों से नहीं होगा। इसके लिए जरूरी है पंचायत स्तर पर आपदा प्रबंधन योजनाएं, किसानों के लिए फसल बीमा और मुआवजा तंत्र, स्कूलों और समुदायों में जन-जागरूकता अभियान, मौसम आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली, जंगलों और जल स्रोतों का संरक्षण