कोल्हान के सरकारी अस्पतालों की हालत खराब, इलाज से ज्यादा हो रहा मरीजों का रेफर…

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Jharkhand: कोल्हान प्रमंडल के प्रमुख सरकारी अस्पतालों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल, घाटशिला अनुमंडल अस्पताल, ईएसआईसी अस्पताल और टाटानगर रेलवे अस्पताल में मरीजों को इलाज के बजाय रेफर किया जा रहा है। डॉक्टरों की भारी कमी, जीवनरक्षक सुविधाओं का अभाव और खराब एंबुलेंस सेवा ने इन अस्पतालों को ‘रेफरल यूनिट’ बना दिया है।

MGM अस्पताल:कोल्हान का सबसे बड़ा अस्पताल MGM 45 दिनों में 180 से अधिक मरीजों को रेफर कर चुका है। अस्पताल में डॉक्टरों की 309 स्वीकृत पदों में 131 खाली हैं। नर्सों के 270 पदों में सिर्फ 11 स्थायी नर्स काम कर रही हैं। वेंटिलेटर की कमी के कारण हर दिन 4-5 मरीजों को निजी अस्पताल भेजना पड़ रहा है।

टाटानगर रेलवे अस्पताल:यह अस्पताल सिर्फ बुखार और मामूली चोट के इलाज तक सीमित रह गया है। गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं है और रेफर करने की प्रक्रिया भी जटिल है। छह स्थायी डॉक्टरों के सहारे हर महीने 50,000 मरीजों का इलाज किया जा रहा है।ईएसआईसी अस्पताल, आदित्यपुर:यहां प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों को रेफर किया जा रहा है। पिछले महीने करीब 450 मरीज रेफर किए गए। अस्पताल में ICU, CCU और वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं नहीं हैं।

घाटशिला अनुमंडल अस्पताल:यह अस्पताल भी अब एक रेफरल सेंटर बन चुका है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और बंद मिनी ब्लड बैंक के कारण मरीजों को काफी परेशानी होती है। मई महीने में यहां 2991 मरीज आए जिनमें से 36 को रेफर करना पड़ा। एंबुलेंस की हालत भी खराब है।

सरकारी दावों के बावजूद कोल्हान के अस्पतालों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। गरीब और मजदूर वर्ग के लोग महंगे निजी अस्पतालों पर निर्भर हो रहे हैं जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।