पैग़ाम-ए-इस्लाम मस्जिद में हज प्रशिक्षण का हुआ आयोजन…
Azad reporter desk: तहरीक पैग़ाम-ए-इस्लाम के ज़ेरे-एहतमाम 11 मई, इतवार को पैग़ाम-ए-इस्लाम मस्जिद व इस्लामिक सेंटर गुलाब बाग़, जमशेदपुर में एक शानदार और बेहद कामयाब “हज तरबियती इज्तिमा” का आयोजन किया गया। इस इज्तिमा का बुनियादी मक़सद हज पर जाने वाले अफ़राद को शरीअत के मुताबिक़ हज की अदायगी उसके आदाब,अरकान और अमली रहनुमाई फ़राहम करना था।
ताकि वह अपने सफ़र-ए-हज को मुकम्मल तौर पर सही तरीके से अंजाम दे सकें।यह प्रोग्राम सुबह 10 बजे शुरू हुआ और नमाज़-ए-ज़ुहर तक जारी रहा। इसकी निज़ामत अल्हाज रज़ी नौशाद साहब ने फ़रमाई। आग़ाज़ तिलावत-ए-कुरआन से हुआ जिसे पैग़ाम-ए-इस्लाम इंग्लिश स्कूल के होनहार तालिब-ए-इल्म शहनैन अहमद ने पेश किया। इसके बाद हम्द और नात शरीफ़ की पुरअसर पेशकश हुई जिसने माहौल को रूहानी बना दिया।इज्तिमा में मुख़्तलिफ उलमा-ए-किराम और हज के माहिरीन ने शिरकत फ़रमाई और अपने-अपने उन्वानात पर तफ़्सील से बयानात पेश किए। मौलाना ग़ुलाम जिलानी साहब ने हज की फ़ज़ीलत पर एक बेहद दिलनशीं और ईमान अफ़रोज़ तक़रीर पेश की।
मौलाना क़ारी असलम रब्बानी ज़ियाई साहब जो ज़ियाईया दारुल किराअत के बानी हैं ने एहराम के मसाइल और उससे मुताल्लिक एहतियातों पर वाज़ेह और मुकम्मल हिदायतें दीं। मौलाना हारून रशीद साहब ने हज की तैयारी से मुताल्लिक किया और अहम बातें बयान कीं जबकि मौलाना इस्हाक़ अंजुम साहब ने उमरा की अदायगी पर बहुत ही असरदार और मालूमाती तक़रीर की। जनाब मोहम्मद यूसुफ़ साहब ने हज से मुताल्लिक दस्तावेज़ी ज़रूरतों और सरकारी प्रोसीजर पर रहनुमाई पेश की, जो हाजियों के लिए बेहद मुफ़ीद साबित हुई। अरफात, मिना और मुज़दलिफ़ा के मसाइल पर मौलाना क़ारी फरीदुद्दीन अशरफ़ी सिवानी साहब ने बेहद अहम और अमली बातें बयान कीं।ख़वातीन से मुताल्लिक मसाइल और आम सवालात को लेकर एक ख़ास सेशन का भी एहतिमाम किया गया, जिसमें मुफ़्ती अब्दुल मालिक मिस्बाही साहब, जो दारैन अकादमी के बानी व सरबराह हैं, ने बहुत ही आसान और असरदार अंदाज़ में ख़वातीन के सवालात के तसल्लीबख़्श जवाब दिए और हज से मुताल्लिक उनके मसाइल पर रौशनी डाली।प्रोग्राम के इख़ताम पर हज़रत सैयद सैफुद्दीन अस्दक़ चिश्ती साहब, जो तहरीक पैग़ाम-ए-इस्लाम के बानी व सरबराह हैं, ने रूहानी अंदाज़ में दुआ फ़रमाई, हाजियों को क़ीमती नसीहतें दीं और तमाम मेहमानों का दिल से शुक्रिया अदा किया।
इज्तिमा का समापन सलातो सलाम और दुआ के साथ हुआ। नमाज़-ए-ज़ुहर के बाद तमाम शिरकत करने वालों के लिए लज़ीज़ ज़ियाफ़त का भी बेहतरीन इंतेज़ाम किया गया था।


