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Breaking:- टाटानगर स्टेशन के पास भीषण सड़क हादसा, बड़े वाहन की चपेट में आने से युवक की मौत || शहर में हर दूसरे दिन हो रही है सड़क दुर्घटना

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जमशेदपुर में शुक्रवार देर रात टाटानगर रेलवे स्टेशन के पास एक भीषण सड़क हादसा हुआ। हादसे में एक युवक की बड़े वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई।

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जानकारी के अनुसार देर रात युवक डिवाइडर को फांद कर सड़क के दूसरी तरफ जाने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक बड़े वाहन की चपेट में वह आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

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घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर ऑटो के माध्यम से एमजीएम अस्पताल भेजा जहां शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

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फिलहाल मृतक की पहचान और हादसे के संबंध में अन्य जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

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जमशेदपुर में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन शहर की सड़कों पर हादसे हो रहे हैं और कई मामलों में बड़े वाहनों की चपेट में आने से लोगों की जान जा रही है। टाटानगर स्टेशन के पास हुआ ताजा हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि टाटानगर स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण इलाके के पास, जहां हर दिन बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना होता है वहां सड़क पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था क्यों नहीं है? रात के वक्त अंधेरा होने की वजह से वाहन चालकों और पैदल चलने वाले लोगों के लिए मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
सड़क सुरक्षा सिर्फ हादसे के बाद पुलिस की कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जरूरत है कि शहर की सड़कों, डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक सिग्नल और बड़े वाहनों की आवाजाही को लेकर एक मजबूत और स्पष्ट व्यवस्था तैयार की जाए।

सवाल यह भी है कि आखिर जमशेदपुर में प्रॉपर ट्रैफिक रोड मैप कब तैयार होगा? शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए ट्रैफिक एसपी की नियुक्ति कब होगी? और सड़क हादसों को रोकने के लिए जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही आखिर कब तय होगी?
हर हादसे के बाद जांच और कार्रवाई की बात होती है लेकिन जरूरत इस बात की है कि हादसा होने से पहले ही ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए जिससे लोगों की जान बचाई जा सके।
आखिर जमशेदपुर की सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था कब मजबूत होगी और सड़क हादसों का यह सिलसिला कब थमेगा?