JHARKHAND : एनसीपी में बढ़ा अंदरूनी विवाद झारखंड के नेता ने सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष बनने को दी कानूनी चुनौती

RANCHI / MUMBAI : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में संगठनात्मक विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सच्चिदानंद सिंह ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में उनके चुनाव को पार्टी संविधान के विपरीत बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है।
सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और राष्ट्रीय महासचिव एवं चुनाव नोडल अधिकारी बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया है कि 26 फरवरी को मुंबई में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान अध्यक्षीय चुनाव में पार्टी संविधान की अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
उनका कहना है कि पूर्व अध्यक्ष अजित पवार के निधन के बाद 17 फरवरी को हुई बैठक में प्रफुल्ल पटेल को अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए रखने का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद अगले ही दिन बिना संवैधानिक प्रक्रिया पूरी किए नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि चुनाव के लिए स्वतंत्र केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई नामांकन प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और मतदान की औपचारिक प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई। सच्चिदानंद सिंह का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय सचिव होने के बावजूद उन्हें अधिवेशन की विधिवत सूचना नहीं दी गई और न ही चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला।
उन्होंने पार्टी नेतृत्व को 15 दिन के भीतर चुनाव आयोग को भेजे गए दस्तावेज वापस लेने सुनेत्रा पवार के चुनाव को निरस्त करने और पार्टी संविधान के अनुरूप नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो वह अदालत और चुनाव आयोग का रुख करेंगे।
इस पूरे विवाद पर एनसीपी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि अजित पवार के निधन से पार्टी में जो खालीपन आया है उसे भरना आसान नहीं है और संगठन में सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।
जोहार लाइव से बातचीत में सच्चिदानंद सिंह ने कहा कि उनका कदम पूरी तरह संगठन के आंतरिक लोकतंत्र और पार्टी संविधान की रक्षा के लिए है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी वरिष्ठ नेता के इशारे पर नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि फरवरी में ही उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर जवाब मांगा था लेकिन अब तक कोई उत्तर नहीं मिला।
इस बीच सूत्रों के अनुसार राज्यसभा सदस्य बनने के बाद पार्थ पवार का संगठनात्मक मामलों में प्रभाव बढ़ा है। बताया जा रहा है कि वह कई अहम फैसलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं जिससे पार्टी के कुछ नेता और पदाधिकारी असहज हैं। वहीं यह भी चर्चा है कि हाल ही में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर पार्टी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की।

