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JHARKHAND : इस्तीफा मिलने की अकुलाहट के बीच इस्तीफों के इतिहास का किस्सा

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झारखंड की राजनीति में इस्तीफों और दल-बदल की सियासत का लंबा इतिहास रहा है. साल 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के टिकट पर छह विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. लेकिन सरकार गठन के कुछ ही समय बाद अमर कुमार बाउरी और रणधीर सिंह समेत छह विधायकों ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया.

भाजपा में शामिल होने के बाद अमर कुमार बाउरी और रणधीर सिंह को रघुवर दास सरकार में मंत्री बनाया गया. इस फैसले के खिलाफ विपक्ष ने दल-बदल कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने और मंत्री पद से हटाने की मांग करते हुए विधानसभा से लेकर अदालत तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. मंत्रियों के इस्तीफे की मांग स्पीकर के समक्ष सुनवाई और अदालत में चली बहसों ने उस समय झारखंड की राजनीति को महीनों तक गर्माए रखा.

अब एक बार फिर राज्य की राजनीति में इस्तीफे को लेकर हलचल तेज है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के बागी तेवर और अफसरशाही से नाराज होकर सरकारी सुरक्षा लौटाने के फैसले ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है. मौजूदा घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति के उसी पुराने दौर की याद ताजा कर दी है जब इस्तीफे और दल-बदल सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दे बन गए थे।