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RANCHI : बच्चा बेचने के मामले में मिशनरीज ऑफ चैरिटी को बड़ी राहत कोर्ट ने किया आरोपमुक्त

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RANCHI : बच्चा बेचने के बहुचर्चित मामले में रांची सिविल कोर्ट से मिशनरीज ऑफ चैरिटी को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने 7 जुलाई को सुनाए अपने फैसले में सिस्टर कौनसिलिया बखला और सिस्टर अनिमा इंदवार को आरोपों से मुक्त कर दिया। फैसले के बाद ईसाई समाज के लोगों ने इसका स्वागत किया और इसे न्याय की जीत बताया।

पूर्व टीएसी सदस्य रतन तिर्की ने कहा कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर लगाए गए आरोप निराधार थे। उनके अनुसार इस संस्था की स्थापना संत मदर टेरेसा ने समाज के गरीब बीमार असहाय और परित्यक्त लोगों की सेवा के उद्देश्य से की थी। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले ने स्पष्ट कर दिया कि आरोप साबित नहीं हो सके।

रतन तिर्की ने कहा कि निर्मल हृदय जैसी संस्थाएं उन नवजात और बेसहारा बच्चों की देखभाल करती हैं जिन्हें समाज अपनाने से इनकार कर देता है। उनके मुताबिक संस्था को बदनाम करने की कोशिश की गई थी लेकिन अदालत के फैसले से सच्चाई सामने आ गई।

वहीं रांची मेयर पद के पूर्व प्रत्याशी प्रवीण कच्छप ने भी फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सत्य के पक्ष में आया है। उनका कहना था कि निर्मल हृदय मिशनरीज ऑफ चैरिटी में सभी धर्मों के लोग स्वेच्छा से सहयोग करते हैं और संस्था जरूरतमंद बच्चों के पालन पोषण का कार्य करती है।


3 जुलाई 2018 को रांची स्थित निर्मल हृदय मिशनरीज ऑफ चैरिटी से एक नवजात शिशु को कथित तौर पर डेढ़ लाख रुपये में बेचने का मामला सामने आया था। इस मामले में संस्था की सिस्टर कौनसिलिया बखला और सिस्टर अनिमा इंदवार पर उत्तर प्रदेश के एक दंपति को बच्चा बेचने का आरोप लगाया गया था। करीब आठ साल बाद 7 जुलाई को रांची सिविल कोर्ट ने दोनों को आरोपों से मुक्त कर दिया।

इस मामले पर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावे रहे हैं। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित आरोपियों को आरोपमुक्त किया है। किसी भी पक्ष द्वारा फैसले को चुनौती दिए जाने की स्थिति में आगे की कानूनी प्रक्रिया संभव है।