151 साल का सफर: बरगद के पेड़ से शुरू हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज आज भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव

NEW DELHI : एशिया का सबसे पुराना और भारत का प्रमुख शेयर बाजार बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) 151 वर्षों का गौरवशाली सफर पूरा कर चुका है। वर्ष 1875 में कुछ कारोबारियों ने मुंबई में एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर शेयरों की खरीद-बिक्री शुरू की थी। आज वही पहल दुनिया के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में शुमार बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का रूप ले चुकी है और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का अहम आधार बन गई है।
अपने 151 वर्षों के इतिहास में बीएसई ने देश के आर्थिक उतार चढ़ाव बड़े वित्तीय सुधारों रिकॉर्ड तेजी और कई चर्चित घोटालों को करीब से देखा है। भारतीय शेयर बाजार की यात्रा में कई ऐसे घटनाक्रम रहे जिन्होंने वित्तीय व्यवस्था और निवेशकों के भरोसे पर गहरा प्रभाव डाला।
इनमें शारदा चिटफंड घोटाला प्रमुख रहा जिसमें कंपनी पर निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये जुटाने और धोखाधड़ी का आरोप लगा। वर्ष 2013 में कंपनी के बंद होने के बाद लाखों छोटे और मध्यम वर्गीय निवेशकों की जमा पूंजी डूब गई। वहीं विजय माल्या और किंगफिशर एयरलाइंस का मामला भी देश के सबसे चर्चित बैंकिंग घोटालों में शामिल रहा। विजय माल्या पर विभिन्न बैंकों से 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लेकर उसका भुगतान नहीं करने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे। वर्ष 2016 में कानूनी कार्रवाई से पहले उनके विदेश चले जाने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि भारतीय शेयर बाजार ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां भी हासिल की हैं। वर्ष 1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा लागू किए गए आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार को नई दिशा दी। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए बाजार खोला गया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में ढील दी गई और कई सुधार लागू किए गए। इन कदमों से विदेशी निवेश बढ़ा और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।
इसके अलावा वर्ष 1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण भारतीय आर्थिक इतिहास का महत्वपूर्ण निर्णय माना जाता है। इस फैसले से बैंकिंग सेवाओं का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक हुआ और किसानों छोटे उद्योगों तथा आम लोगों को बैंकिंग सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार स्टॉक एक्सचेंज किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। भारत में बीएसई और एनएसई कंपनियों को पूंजी जुटाने तथा निवेशकों को पारदर्शी तरीके से निवेश करने का मंच उपलब्ध कराते हैं। इससे कंपनियों के विस्तार रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को गति मिलती है। साथ ही शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक देश की आर्थिक स्थिति के महत्वपूर्ण संकेतक माने जाते हैं।
बरगद के पेड़ के नीचे शुरू हुई यह यात्रा आज भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक वित्तीय पहचान का प्रतीक बन चुकी है।


