JHARKHAND : जेएमएम बनाम बीजेपी: चार दिनों की नज़दीकियां फिर वही लंबी दूरी

झारखंड की राजनीति में पिछले कुछ समय से एक चर्चा लगातार तैरती रही है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और भारतीय जनता पार्टी (BJP ) के बीच राजनीतिक नज़दीकियां बढ़ रही हैं। हेमंत सोरेन सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद यह अटकलें तेज हुईं खासकर तब जब कांग्रेस और जेएमएम के नेताओं के बीच कई मुद्दों पर सार्वजनिक मतभेद देखने को मिले। इनमें जेटेट की भाषा नीति बोर्ड-परिषदों में हिस्सेदारी और बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान इंडिया गठबंधन में जेएमएम की भूमिका जैसे विषय शामिल रहे।
इन्हीं घटनाक्रमों के बीच राजनीतिक गलियारों में संभावित समझौते की चर्चाएं भी सामने आईं। चर्चाओं के अनुसार यदि जेएमएम और बीजेपी के बीच राजनीतिक समीकरण बनता तो इसके बदले कुछ शर्तों पर सहमति हो सकती थी। इनमें जांच एजेंसियों से राहत शिबू सोरेन को भारत रत्नकेंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और अन्य राज्यों की आदिवासी बहुल सीटों पर चुनाव लड़ने की स्वतंत्रता जैसी बातें शामिल बताई गईं। इसके बदले हेमंत सोरेन के केंद्र की राजनीति में जाने और राज्य की कमान किसी अन्य नेता को सौंपने जैसी संभावनाओं की भी चर्चा रही। इन दावों की कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई और कथित बातचीत किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।
इस दौरान दोनों दलों के बीच राजनीतिक हमलों की धार अपेक्षाकृत कम दिखाई दी। दोनों दल एक-दूसरे के प्रति संयमित रुख अपनाते हुए कांग्रेस पर अधिक आक्रामक नजर आए। कई मौकों पर जेएमएम नेताओं ने अपने सहयोगियों पर भी तीखी टिप्पणियां कीं जिससे गठबंधन के भीतर मतभेद की चर्चा होती रही।
राज्यसभा चुनाव के दौरान भी दोनों दलों के बीच इसी तरह का अपेक्षाकृत नरम राजनीतिक माहौल देखने को मिला। चुनाव प्रक्रिया के दौरान बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी को इंडिया गठबंधन के कुछ विधायकों का प्रत्यक्ष और परोक्ष समर्थन मिलने की चर्चा रही, जिसके बाद राजनीतिक अटकलों को और बल मिला।
इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और उनकी पत्नी गीता कोड़ा बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। उद्योगपति विष्णु अग्रवाल पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच जारी है और यह मामला अदालत में विचाराधीन है। सुनील तिवारी पर भी पहले यौन उत्पीड़न के आरोप लग चुके हैं।
2 जुलाई को जमशेदपुर में करनी सेना के नेता हिमांशु की हत्या के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि केवल पुलिस अधिकारियों के निलंबन से न्याय नहीं होगा। उन्होंने घटना के दौरान मौजूद पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे।
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो नेता प्रतिपक्ष के रूप में बाबूलाल मरांडी सरकार की आलोचना कर रहे हैं जबकि मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन अपनी राजनीतिक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। फिलहाल झारखंड की राजनीति में संभावित समीकरणों और सत्ता संतुलन को लेकर अटकलें जारी है भविष्य में यदि कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव होता है तो उसकी दिशा और शर्तें उस समय की परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी।

