श्रावणी मेला 2026: VIP दर्शन पर रोक झारखंड-बिहार ने सुरक्षा और सुविधा के लिए बनाया संयुक्त प्लान

DEOGHAR : राजकीय श्रावणी मेला 2026 को सुरक्षित सुचारु और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने के लिए झारखंड और बिहार प्रशासन ने संयुक्त कार्ययोजना तैयार की है। शनिवार को देवघर परिसदन में आयोजित अंतरराज्यीय समन्वय बैठक में सुरक्षा यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
बैठक की अध्यक्षता संथाल परगना आयुक्त संजय कुमार ने की। इसमें देवघर के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया समेत झारखंड और बिहार के विभिन्न जिलों के उपायुक्त पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य सुल्तानगंज से देवघर तक आने वाले लाखों कांवरियों को सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना था।
बैठक में तय किया गया कि पूरे कांवरिया मार्ग पर दोनों राज्यों के अधिकारी 24 घंटे आपसी समन्वय बनाए रखेंगे। इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सूचना तंत्र का भी उपयोग किया जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस बार श्रावणी मेले के दौरान किसी भी तरह का वीआईपी या आउट-ऑफ-टर्न दर्शन नहीं होगा। इस फैसले का उद्देश्य आम श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के सुगमता से बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलार्पण की सुविधा देना है।
सुरक्षा के मद्देनज़र डबल डेकर कांवरिया वाहनों के देवघर में प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा छोटे और बड़े वाहनों की छतों पर श्रद्धालुओं को बैठाकर लाने की भी अनुमति नहीं होगी। इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सीमावर्ती जिलों से सहयोग मांगा गया है।
प्रशासन के अनुसार रविवार और सोमवार को श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ रहने की संभावना है। इसे देखते हुए कई होल्डिंग प्वाइंट और टेंट सिटी तैयार किए गए हैं। यहां बिजली पंखे पेयजल शौचालय स्नानघर मोबाइल चार्जिंग स्वास्थ्य केंद्र और साफ-सफाई जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। भीड़ नियंत्रण के लिए मजिस्ट्रेट पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती भी की जाएगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि भागलपुर बांका जमुई मुंगेर गोड्डा दु मका और देवघर के प्रशासनिक अधिकारी लगातार संपर्क में रहेंगे। सीमावर्ती थानों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा तथा चेकपोस्ट और गश्ती दल चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगे।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बच्चों और बुजुर्गों के पास उनका नाम पता और मोबाइल नंबर रखने के लिए दोनों राज्यों में विशेष जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें शीघ्र उनके परिजनों तक पहुंचाया जा सके।

