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JHARKHAND : लोहरदगा के हाटी गांव में धर्मांतरण विरोधी प्रस्ताव पारित पादरी पास्टरों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला

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LOHARDAGA: झारखंड के लोहरदगा जिले के भंडरा प्रखंड स्थित हाटी गांव में धर्मांतरण के मुद्दे पर ग्राम सभा के एक फैसले ने चर्चा तेज कर दी है। शुक्रवार को आयोजित विशेष ग्राम सभा में धर्मांतरण के उद्देश्य से गांव में आने वाले पादरियों पास्टरों मिशनरियों और धार्मिक प्रचार से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके साथ ही गांव में प्रार्थना सभा और चंगाई सभा के आयोजन पर भी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया।

ग्राम सभा के फैसले के बाद गांव की सीमा पर एक सूचना बोर्ड भी लगाया गया है। बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि धर्मांतरण या धार्मिक प्रचार के उद्देश्य से गांव में प्रवेश करने वाले लोगों के खिलाफ ग्राम सभा के निर्णय के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में मौजूद भारतीय राजस्व सेवा (IRS) की अधिकारी निशा उरांव ने इस पहल को गांव के स्वाभिमान और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि गांव की सीमा पर लगाया गया सूचना बोर्ड केवल एक बोर्ड नहीं बल्कि अपनी परंपरा संस्कृति और धार्मिक आस्था की रक्षा का संकल्प है।

निशा उरांव ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-25 और पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को अपने पारंपरिक अधिकारों सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहले भी ऐसे मामलों में ग्राम सभा के कुछ अधिकारों और सूचना पट्टियों को संवैधानिक मान चुके हैं।

उन्होंने बताया कि इस अभियान में गांव के सनातनी परिवारों ने भी सरना समाज का समर्थन किया है। उनके अनुसार सरना और सनातन समाज की यह एकजुटता समाज को बांटने की कोशिश करने वालों के लिए एक मजबूत संदेश है। उन्होंने कहा कि भविष्य में झारखंड के कई अन्य गांवों में भी इसी तरह के सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे ताकि आदिवासी संस्कृति परंपरा और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित किया जा सके।

ग्राम सभा में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों समाजसेवियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक में जल जंगल जमीन आदिवासी संस्कृति रीति-रिवाज और सामाजिक मूल्यों की रक्षा को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई।