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नई ईपीएफ स्कीम 2026 लागू शादी पढ़ाई और बीमारी के लिए पीएफ निकासी के नियम बदले

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NEW DELHI : केंद्र सरकार ने 74 साल पुरानी ईपीएफ स्कीम 1952 की जगह नई ईपीएफ स्कीम 2026 को अधिसूचित कर दिया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारी भविष्य निधि यानी पीएफ से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाना है। इसके तहत पीएफ निकासी से लेकर नौकरी बदलने और स्वैच्छिक अंशदान तक कई अहम बदलाव किए गए हैं जिनका सीधा असर वेतनभोगी कर्मचारियों पर पड़ेगा।

नई स्कीम के तहत शादी पढ़ाई और गंभीर बीमारी जैसी जरूरतों के लिए पीएफ से पैसे निकालने के नियमों को स्पष्ट किया गया है। साथ ही पीएफ खाते में न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि बनाए रखने की शर्त भी लागू की गई है। इससे कर्मचारियों की भविष्य की बचत सुरक्षित रखने के साथ जरूरत के समय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

नई व्यवस्था में यह भी तय किया गया है कि किन परिस्थितियों में कर्मचारी अपना पूरा पीएफ निकाल सकेंगे और किन मामलों में केवल सीमित राशि की निकासी की अनुमति होगी। इसके अलावा नौकरी बदलने पर पीएफ खाते के संचालन और ट्रांसफर की प्रक्रिया को भी अधिक सरल बनाया गया है ताकि कर्मचारियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

स्कीम में अनिवार्य पीएफ अंशदान के साथ स्वैच्छिक पीएफ योगदान यानी वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड से जुड़े प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है। इससे कर्मचारी अपनी वित्तीय योजना और रिटायरमेंट बचत को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकेंगे।

सरकार का कहना है कि नई ईपीएफ स्कीम 2026 का उद्देश्य कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाना और बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप भविष्य निधि व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।