JHARKHAND : झारखंड के 11 उत्पादों को मिला GI टैग किसानों कारीगरों और स्थानीय उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा

RANCHI : झारखंड के 11 पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने से राज्य के किसानों कारीगरों और स्थानीय उद्योगों के लिए नए अवसर खुल गए हैं। जीआई टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट पहचान और उसके भौगोलिक मूल को कानूनी मान्यता देता है जिससे उसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनती है।
देश में अब तक करीब 650 से अधिक उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। यह मान्यता किसी उत्पाद को 10 वर्षों के लिए दी जाती है जिसके बाद इसका नवीनीकरण कराया जा सकता है।
जीआई टैग प्राप्त करने के लिए संबंधित उत्पाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि विशिष्टता और उसके भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े होने के प्रमाण प्रस्तुत करने होते हैं। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही किसी उत्पाद को यह मान्यता प्रदान की जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार जीआई टैग मिलने से उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ती है नकली उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलती है और किसानों शिल्पकारों व स्थानीय उत्पादकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही इससे निर्यात को भी बढ़ावा मिलता है और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं।
भारत में जीआई टैग केवल घरेलू उत्पादों तक सीमित नहीं है बल्कि कई प्रसिद्ध विदेशी उत्पादों को भी यह मान्यता दी गई है। इनमें स्कॉटलैंड की स्कॉच व्हिस्की कॉन्यैक इटली का प्रोसियुट्टो डी परमा मेक्सिको की टकीला और पेरू का पिस्को शामिल हैं। इन उत्पादों को उनके मूल भौगोलिक क्षेत्र और विशिष्ट गुणवत्ता के आधार पर जीआई टैग प्रदान किया गया है।
झारखंड के 11 उत्पादों को जीआई टैग मिलने से राज्य की पारंपरिक विरासत को नई पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और निर्यात को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


