बेंगलुरु-चेन्नई बुलेट ट्रेन का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा शुरू, वन्यजीव अभयारण्य के नीचे बनेगी 14.79 किमी लंबी सुरंग

Banglore : बेंगलुरु-चेन्नई हाई स्पीड रेल (bullet train ) परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण चरण आंध्र प्रदेश के कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य के नीचे बनने वाली 14.79 किलोमीटर लंबी सुरंग है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के अनुसार अत्याधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि मानसून के दौरान भी इसका निर्माण कार्य प्रभावित नहीं होगा।
बजट 2026 में घोषित इस हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का उद्देश्य बेंगलुरु और चेन्नई के बीच तेज सुरक्षित और आधुनिक रेल संपर्क स्थापित करना है। हालांकि इस परियोजना का सबसे कठिन हिस्सा कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य के नीचे सुरंग बनाना माना जा रहा है जहां इंजीनियरों भूवैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों की टीम मिलकर काम कर रही है।
परियोजना की सबसे खास बात यह है कि सुरंग पूरी तरह जमीन के नीचे बनाई जाएगी जिससे जंगल और वहां रहने वाले वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। भविष्य में जब यह परियोजना पूरी होगी तब अभयारण्य के ऊपर हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सामान्य गतिविधियां जारी रहेंगी जबकि उनके नीचे करीब 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ेगी।
NHSRCL के अधिकारियों के मुताबिक सुरंग निर्माण में आधुनिक टनलिंग तकनीक और उन्नत इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि निर्माण कार्य सुरक्षित तेज और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से पूरा किया जा सके। इसी वजह से मानसून के दौरान भी परियोजना का काम जारी रहेगा।
बेंगलुरु-चेन्नई बुलेट ट्रेन परियोजना को भारत के सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद दोनों महानगरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होगा और दक्षिण भारत में हाई स्पीड रेल नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी।

