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झारखंड हाईकोर्ट: निजी जमीन विवाद पर फैसला नहीं दे सकते राज्य दिव्यांग आयुक्त

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झारखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि राज्य दिव्यांग आयुक्त को निजी व्यक्तियों के बीच जमीन के स्वामित्व या कब्जे से जुड़े मामलों का फैसला करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे विवाद केवल सक्षम सिविल कोर्ट ही सुन और तय कर सकती है।

यह मामला चतरा जिले के एक भूमि विवाद से जुड़ा था, जिसमें एक दिव्यांग व्यक्ति की शिकायत पर राज्य दिव्यांग आयुक्त ने जमीन के स्वामित्व को लेकर आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने इस आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर मानते हुए रद्द कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का उद्देश्य दिव्यांग लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है। इस कानून के तहत आयुक्त को कुछ प्रक्रियात्मक शक्तियां जरूर मिली हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल निजी संपत्ति या जमीन से जुड़े सिविल विवादों का निपटारा करने के लिए नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों को सिविल कोर्ट का ही सहारा लेना होगा।