जापानी पीएम सानाए ताकाइची की भारत यात्रा पर दुनिया की नजर रक्षा सेमीकंडक्टर और ऊर्जा समेत कई समझौतों की उम्मीद

जापान की नई प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची अपने पहले आधिकारिक दौरे पर भारत आने वाली हैं। उनकी यात्रा भारत-जापान के 20वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के अवसर पर हो रही है। ऐसे समय में यह दौरा हो रहा है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियां मध्य पूर्व की अस्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस यात्रा के दौरान भारत और जापान के बीच रक्षा सेमीकंडक्टर स्वच्छ ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और अत्याधुनिक तकनीक से जुड़े करीब 10 महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बन सकती है। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती देना है।
सानाए ताकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की करीबी सहयोगी तथा उनकी नीतियों की उत्तराधिकारी माना जाता है। विदेश और सुरक्षा नीति के मामलों में उनका रुख अपेक्षाकृत सख्त माना जाता है। ऐसे में उनकी भारत यात्रा को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोरोना महामारी के बाद वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में विविधता लाने की कोशिशें तेज हुई हैं। इसी दिशा में भारत और जापान सेमीकंडक्टर निर्माण चिप डिजाइन और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। भारत सरकार भी देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रिक वाहन स्वच्छ ऊर्जा और नई तकनीकों में जापानी निवेश बढ़ाने पर भी दोनों देशों के बीच चर्चा होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में सहयोग से भारत की विनिर्माण क्षमता और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान के बीच बढ़ता रणनीतिक सहयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करेगा। हालांकि चीन पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर की जा रही कई चर्चाएं फिलहाल विश्लेषण और कूटनीतिक आकलन का विषय हैं। आधिकारिक रूप से दोनों देशों ने इस यात्रा को आपसी सहयोग और साझा विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

